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चियर्स, अब हम इसमें भी सबसे आगे हो गये

  • पहले फ्रांस इसमें दुनिया में आगे था

  • पिछले साल के आंकड़े भारत के पक्ष में

  • उत्पादक अब भारत में कारखाना लगायेंगे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह खुशी का नहीं बल्कि चिंता का विषय है। वर्ष 2022 के आंकड़े यह बताते हैं कि अब भारत ही विदेशी स्कॉट व्हिस्की का सबसे बड़ा बाजार बन गया है।

इसके पहले फ्रांस को इसका सबसे बड़ा बाजार माना जाता था। फर्क सिर्फ इतना है कि फ्रांस आर्थिक तौर पर एक संपन्न और विकसित देश है जबकि भारत उसके मुकाबले बहुत गरीब और विकासशील देश है। इंग्लैंड की प्रसिद्ध स्कॉच व्हिस्की का सबसे बड़ा बाजार फ्रांस था। लेकिन 2022 की गणना कहती है कि भारत उस सूची में फ्रांस को पीछे छोड़कर आगे बढ़ गया है।

भारत ने पिछले वर्षों की तुलना में 2022 में मात्रा के हिसाब से 60 प्रतिशत अधिक स्कॉच व्हिस्की का आयात किया। यह बात स्कॉटलैंड के चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अपनी रिपोर्ट में कही है। स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन (एसडब्ल्यूए) ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने इस साल स्कॉच की करीब 22 करोड़ बोतलों का आयात किया है।

वहीं, फ्रांस 20.5 करोड़ बोतलों के साथ फंसा हुआ है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में एक साल के अंदर स्कॉच व्हिस्की का बाजार कितना बढ़ा है। यानी आंकड़ों में 200 फीसदी की बढ़ोतरी। हालांकि कंपनी ने दो अंकों की वृद्धि दर्ज की, स्कॉच व्हिस्की भारत की कुल व्हिस्की मांग का केवल 2 प्रतिशत ही आपूर्ति करती है।

इस रकम को और बढ़ाने पर भी नजर है। इंग्लैंड भारत के साथ मुक्त बाजार समझौते पर बातचीत कर रहा है। यदि सौदा पक्का हो जाता है, तो इंग्लैंड से स्कॉच व्हिस्की के आयात की लागत एक झटके में और भी कम हो जाएगी। इससे भारतीय व्हिस्की बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और विदेशी शराब की कीमत भी आसान होगी।

अब स्कॉच व्हिस्की पर 150 फीसदी टैरिफ है। एसडब्ल्यूए के सूत्रों का दावा है कि एक बार मुक्त बाजार समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद इसका भुगतान नहीं करना होगा। उस स्थिति में, स्कॉटलैंड में व्हिस्की कंपनियों के बाजार का और विस्तार होगा।

स्थिति के आधार पर अतिरिक्त 100 मिलियन ग्रेट ब्रिटेन पाउंड का निवेश करने की भी योजना है। एसडब्ल्यू द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल स्कॉच व्हिस्की की औसतन 53 बोतलें हर सेकंड निर्यात की गईं।

जो 2021 में 44 थी। ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की की एक्सपोर्ट मार्केट में सबसे ज्यादा डिमांड है। बाजार में मौजूद 59 फीसदी स्कॉच व्हिस्की इसी किस्म की होती है। अगला ‘सिंगल माल्ट’ स्कॉच व्हिस्की है। जो बाजार के 32 फीसदी हिस्से पर कब्जा करता है। वैसे अनुमान है कि कई विदेशी शराब उत्पादक भी इस बड़े बाजार को देखकर यहां पर अपना संयंत्र स्थापित करने पर भी विचार कर रहे हैं।