Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
EVM में टोटलाइजर से क्यों नहीं हो सकती वोटों की गिनती?: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मां... किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से... शिवपुरी में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 10 दिनों में एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, डेंगू-मलेरिया निगे... भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन: नई दिल्ली में ऐलान अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर बने कप्तान, युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी... 'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की नई सीरीज 'हुंकार: द रोर' का टीजर रिलीज: जानें कहानी, स्टार कास्ट और OTT र... नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई 'हिमालयी सुनामी': रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव क... LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बि... UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन, कुल 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज; NPCI ने ... श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भोग माखन-मिश्री और पंचामृत की विधि; जानें मलाई से शुद्ध माखन बनाने का आसान न...

राजनीति नहीं करें स्थानीयता को लागू करायेः रतन तिर्की

रांचीः झारखंड के राज्यपाल द्वारा 1932 के आधार पर स्थानीय नीति विधेयक को पुनर्समीक्षा हेतु वापस कर देने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टीएसी के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने कहा कि राज्यपाल को पांचवीं अनुसूची के अनुपालन पर ही आपत्ति है। इसलिये उन्होंने स्थानीय नीति को लौटाया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टियों को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

रतन तिर्की ने कहा कि वर्ष 2002 में झारखंड हाईकोर्ट ने कहा था कि झारखंड सरकार चाहे तो वह अपनी स्थानीय नीति बना सकती है। लेकिन राज्यपाल ने सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देकर इसे वापस कर दिया है जो राज्य के आदिवासियों और खतियानी झाड़खंडियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

श्री तिर्की ने कहा है कि झारखंड उच्च न्यायालय के महाअधिवक्ता राजीव रंजन को इसपर सरकार को सुझाव देना चाहिए। रतन तिर्की ने कहा कि झारखंड सरकार को स्थानीय नीति पर जल्द ही अध्यादेश लाना चाहिये। राज्य के आदिवासी और झाड़खंडी राज्यपाल के नकारात्मक रूख से नाराज़ है।

रतन तिर्की ने यह भी कहा है कि भाजपा कांग्रेस आजसू राजद और वामपंथी दलों को भी अपनी पार्टियों का स्थानीय नीति पर रुख स्पष्ट करना चाहिए।  रतन तिर्की ने कहा कि राज्यपाल ने अभी तो स्थानीय नीति विधेयक वापस लौटाया है।

अगर रही रवैया रहा तो सरना धर्म कोड मामला भी वापस लौटा दिया जायेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुझाव देते हुए कहा है कि जोहार यात्रा के दौरान अपार जनसमर्थन 1932 के स्थानीय नीति को लेकर ही मिल रहा है इसलिए हर हाल में स्थानीय नीति पर अध्यादेश आगे लाने की ओर कदम बढ़ाते।

झारखंड के राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार की ओर से 1932 के आधार पर स्थानीय नीति बनाए जानें के निर्णय से संबंधित फाइल पर अपनी असहमति जताते हुए लौटाए जानें का मामला दुर्भागपूर्ण एवम राजनीती से प्रेरित है। अंततः राज्य की स्थानीय जनता के साथ फिर धोखा हुआ है।

वैसे भी जब से राज्य का निर्माण हुआ है और निर्माण से पहले राज्यपाल की ओर से आदिवासियों और अन्य स्थानीय लोगों के हित में किसी भी मामले पर कोई ठोस नीतियां नहीं बनी बल्कि बनने वाली नीतियों को बाधित ही किया गया। पांचवी अनुसूची का क्षेत्र होने के नाते राजयपाल की जिम्मेवारी बनती है की यहां के आदिवासियों एवम अन्य स्थानीय लोगों के विकास की नीति तय करें।

बड़े शर्म की बात है की राज्य सरकार और राज्य भवन की राजनीति शिकार आम जनता हो रही है। हम यही कहना चाहते हैं की झारखंड की आदिवासी एवम स्थानीय जनता के विकास के लिए ठोस नीति आवश्यक है। यह कैसे होगा यह राज भवन और राज्य सरकार को तय करना है। अगर ऐसा नहीं होता है तो आम जनता को मजबूरन सड़कों पर उतरना होगा ।