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बिहार,झारखंड,उत्तर प्रदेश और असम के पानी में  कैंसर का खतरा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: जो पानी आप पी रहे हैं उसे पीने से आपको कैंसर का खतरा है तो आप जरूर चौंकेंगे। शोधकर्ताओं ने अपने अध्यन में यह पाया है कि अगर पीने वाले पानी के माध्यम से आपके शरीर में आर्सेनिक जाता है तो इससे गाल ब्लैडर कैंसर का खतरा है। यह स्टडी बिहार,झारखंड,उत्तर प्रदेश और असम में दो साल चली जिसके बाद यह नतीजे सामने आए हैं।

आपको बता दें कि आर्सेनिक के तत्व ग्राउंड वाटर में भी पाए जाते हैं। शोध में यह पाया गया है कि बिहार और असम के अलावा देश के और जिलों में भी लोग आर्सेनिक युक्त पानी को लोग पी रहे हैं जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

यह शोध भारत के दो आर्सेनिक प्रभावित राज्यों असम और बिहार में सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल हेल्थ, पब्लि हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल, डॉ. भुवनेश्वर बरुआ कैंसर संस्थान के वैज्ञानिको की तरफ से किया गया है। वहीं महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र ,पटना और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- खड़गपुर, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन  के सहयोग से एक अस्पताल में यह स्टडी की गई थी जहां असम-बिहार के मरीज सबसे ज्यादा थे।

इस स्टडी में पाया गया है कि पीने के पानी में अगर आर्सेनिक की मात्रा कम या अधिक स्तर पर है तो यह गाल ब्लैडर कैंसर का कारक हो सकता है। महावीर कैंसर संस्थान में अनुसंधान विभाग के चीफ और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि जहां आबदी जहरीले आर्सेनिक की चपेट में सबसे ज्यादा है उनकी निगरानी होनी चाहिए।

घोष ने आगे कहा कि बिहार के कई जिलों जैसे पटना, बक्सर, मनेर, भोजपुर और भागलपुर सहित गंगा नदी बेल्ट के साथ की जिलों में आर्सेनिक मौजूद है। आपको बता दें कि  बिहार,झारखंड,उत्तर प्रदेश और असम  के 69 में से 48 जिलों में भूजल ने 10 पीसीबी से अधिक आर्सेनिक स्तर दिखा है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से निर्धारित स्तर से अधिक है।

आर्सेनिक असल में एक अंधहीन और स्वादहीन उपधातु है। यह जमीन की सतह के नीचे काफी मात्रा में उपलब्ध है। य ह सामान्य रूप से चट्टान, मिट्टी, पानी और वायु में काफी मात्रा में पाया जाता है। यह धरती की तह में प्रचु मात्रा में पाए जाना वाला 26वां तत्व है।