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शिखरजी पर झामुमो के हमले से फिर बैकफुट पर भाजपा

  • रघुवर दास के समय पर जारी नोटिफिकेशन

  • पहले के घटनाक्रमों को याद दिलाया सुप्रियो ने

  • स्थानीयता और नियोजन पर पहले ही घेराबंदी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः गिरिडीह के विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पारसनाथपर जारी बयानबाजी के दौरान झामुमो ने फिर से भाजपा को घेर दिया है। दरअसल इसे पर्यटन स्थल घोषित करने के मुद्दे पर भाजपा ने आगे बढ़चढ़ कर हेमंत सोरेन की सरकार की आलोचना की थी। इसके बाद झामुमो की तरफ से सुप्रियो भट्टाचार्य का बयान आने के बाद लोगों का ध्यान पूर्व के घटनाक्रमों की तरफ चला गया है।

वैसे पारसनाथ के इस जैन तीर्थस्थल को शिखरजी के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है। मंगलवार को पार्टी के कैंप कार्यालय में केंद्रीय समिति के सदस्य सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पारसनाथ सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने का निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के शासनकाल में हुआ था। रघुवर सरकार के समय  दो गजट जारी हुए थे।

उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि सच्चाई को जानकर बातें रखें। आज इस मुद्दे को लेकर पाखंड और राजनीति करने वाले भाजपा नेता भूल गए कि पारसनाथ को पर्यटक स्थल पूर्व की रघुवर सरकार और केंद्र की मोदी सरकार ने घोषित किया था। सुप्रियो ने कहा कि भाजपा झूठ और फरेब की राजनीति करती है।

झामुमो नेता ने बताया कि रघुवर दास के मुख्यमंत्री काल में पर्यटन, कला संस्कृति व खेलकूद विभाग ने 22 अक्टूबर 2018 को कार्यालय आदेश जारी किया था, जिसमें उल्लेख है कि पारसनाथ सम्मेद शिखरजी सदियों से जैन धर्म का पवित्र व पूजनीय स्थल है। इसकी पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

उनके कार्यकाल में ही 26 फरवरी 2019 को विभाग ने एक गजट प्रकाशित किया गया। इसमें गिरिडीह के पारसनाथ मधुवन को पर्यटन स्थल घोषित किया गया। इसी गजट के आधार पर केंद्र की मोदी सरकार ने दो अगस्त 2019 को पारसनाथ को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया।

झामुमो नेता ने कहा कि राज्य सरकार ने 20 दिसंबर को ही जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल से कहा था कि जैन धर्म की भावना का ख्याल रखा जाएगा। 21 दिसंबर को विभाग ने गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक को सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को बनाए रखने संबंधी आवश्यक निर्देश जारी किए। इसके बाद भी भाजपा के नेताओँ का बयान कुछ ऐसा रहा मानों यह सारा कुछ वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ही हो रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी मौके पर रघुवर दास की सरकार के कार्यकाल में लिये गये फैसलों पर सवाल उठा दिया है।

बता दें कि इससे पहले स्थानीयता और नियोजन नीति के मुद्दे पर भी भाजपा को घेर चुकी है। स्थानीयता का ऐसा मुद्दा है, जिसकी मांग की वजह से ही अलग झारखंड राज्य के आंदोलन की नींव पड़ी थी। यहां के रोजगार और कारोबार पर बाहरी लोगों के कब्जे की वजह से उपजा आक्रोश ही आंदोलन को आगे बढ़ाता रहा।

अब उस मुद्दे पर भी हेमंत ने गेंद को केंद्र सरकार के पाले में भेजकर भाजपा को फंसा दिया है। अब उसके बाद पारसनाथ के शिखरजी यानी मधुवन पर यह राजनीति गरमायी है। इस मुद्दे पर नये साल के दिन भी जैन धर्म को मानने वालों ने पूरे देश भर में अपना प्रदर्शन कर इस फैसले का विरोध किया था।