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जर्मनी में फिर से एक और हिटलर का भंडा फूटा

बर्लिनः एक विद्रोह की साजिशों को विफल किये जाने के बाद जर्मनी में नाजीवाद के मौजूद होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर देश के कई इलाकों पर छापा मारा है। इस क्रम में अब तक 25 लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं। यह सभी लोग एक सैनिक विद्रोह के जरिए देश की सरकार को गिराना चाहते थे।

अब इस पर कार्रवाई होने के बाद पहली बार यह पता चला है कि इस देश के अंदर एक स्वयंभू राजतंत्र भी है। इस राजतंत्र ने अपने इलाके में अपने नियम भी बना रखे हैं। वहां से अपनी मुद्रा छापते हैं तथा लोगों को अलग पहचान पत्र भी देते हैं। यहां तक कि इस कथित राजतंत्र का अपना झंडा भी है। चिंता का विषय यह है कि इस राजतंत्र के समर्थक वैसी सोच वाले लोग हैं, जो जर्मनी को देश ही नहीं मानते और उनका आचरण हिटलर के नाजी तंत्र के जैसा ही है। इन तथ्यों की जानकारी होने के बाद अब जर्मन सरकार पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है।

इस राजतंत्र के कथित राजा के तौर पर पीटर फिटजेक का नाम आया है, जो हाल के किसी ऐसे विद्रोह से अपना रिश्ता कबूल नहीं करते। लेकिन वह अपने इलाके के राजा है, इस बात से इंकार भी नहीं करते। अनुमान है कि उसके राज्य में अभी करीब 21 हजार लोग हैं। माना जाता है कि यह सभी लोग उसी सोच के प्रभावित है जो देश में फिर से नाजीवाद को बढ़ावा देने का बड़ा कारण बन सकता है।

अब जानकारी मिली है कि उस कथित राजा ने दूसरे इलाकों में भी जमीन खरीदकर अपनी प्रजा को बसाना चालू कर दिया है। कुछ ऐसे इलाकों की जानकारी अब सरकारी एजेंसियों को भी मिल चुकी है। जांच एजेंसियों को करीब दो वर्ष पहले ही ऐसी किसी राष्ट्रविरोधी गतिविधि की गुप्त सूचना मिली थी। अब हथियारबंद विद्रोह का भंडाफोड़ होने के बाद पता चला है कि कोरोना की परिस्थितियों के बाद इस संगठन की ताकत तेजी से बढ़ी है।

इस बीच यह पता चला है कि इस नये स्वयंभू राजा ने पहले मेयर का चुनाव तथा जर्मनी के संसद का चुनाव में भी अपना हाथ आजमाया था लेकिन वह दोनों ही चुनावों में असफल साबित हुआ था। बर्लिन के दक्षिण में करीब डेढ़ घंटे की दूरी पर इस स्वयंभू राजा के प्रजाओं की दूसरी बस्ती है। इस गांव का नाम बारवाल्डे है।

यहां के लोग सरकार को कोई टैक्स नहीं देते और अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजते हैं। इसके साथ साथ वे आधुनिक दवाइयों पर भी भरोसा नहीं करते हैं। इस स्वयंभू राजा के इलाके के नागरिकों में से किसी ने भी कोरोना का वैक्सिन भी नहीं लिया है। अब सशस्त्र विद्रोह का भंडाफोड होने के बाद इस पूरे संगठन की तमाम गतिविधियों की जानकारी एकत्रित की जा रही है।