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तिरुपति लड्डू घी मिलावट के मामले में निर्देश

यह मामला आंध्र से बाहर नहीं जाएगाः सुप्रीम कोर्ट

भाषा की समझ की दलील दी थी

राज्य के गवाहों को बाहर नहीं भेजें

जगन सरकार पर लगा है गंभीर आरोप

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने आरोपी मछिंद्र शांताराम लांके द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। महाराष्ट्र स्थित डेयरी उद्योगपति लांके ‘मलगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के प्रबंध निदेशक हैं। आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि राज्य के राजनीतिक नेता मामले पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के लिए एक प्रतिकूल माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के अधिकांश आरोपियों के लिए भाषा की बाधा भी एक समस्या है। हालांकि, पीठ ने स्थानांतरण से इनकार करते हुए कहा कि राज्य के कई गवाहों को दूसरे राज्य में भेजने से सुनवाई प्रभावित होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही गठित एक स्वतंत्र विशेष जांच दल द्वारा की गई है।

बता दें कि 4 अक्टूबर 2024 को शीर्ष अदालत ने करोड़ों लोगों की भावनाओं को शांत करने के लिए पांच सदस्यीय स्वतंत्र एसआईटी का गठन किया था। इस टीम में सीबीआई और आंध्र प्रदेश पुलिस के दो-दो अधिकारी तथा एफएसएसएआई का एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल है, जो सीबीआई निदेशक की देखरेख में काम कर रहा है। इससे पूर्व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि पिछली वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद यह बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था।