जनता का पानी हड़प रहे हैं वहां के डेटा सेंटर
जकार्ताः इंडोनेशिया के बाटम द्वीप स्थित नोंगसा डिजिटल पार्क परिसर में हाल ही में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब खाली प्लास्टिक की बोतलें और कैन लेकर पहुंचे करीब 300 उग्र स्थानीय नागरिकों ने परिसर पर धावा बोल दिया। आक्रोशित लोग हाथों में खाली बर्तन लहराते हुए पानी! पानी! के नारे लगा रहे थे। निवासियों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से उनके घरों के नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आई है, जबकि नोंगसा डिजिटल पार्क के भीतर स्थित डेटा सेंटरों को उनके सर्वरों को ओवरहीटिंग (अधिक गर्म होने) से बचाने के लिए निर्बाध और पर्याप्त पानी की आपूर्ति दी जा रही है।
डेटा सेंटर आने से पहले कभी ऐसा संकट नहीं हुआ
विरोध प्रदर्शन में शामिल स्थानीय निवासी देवी सुसंती ने अपने गुस्से का इजहार करते हुए कहा, पिछले तीन महीनों से हमारे नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं निकली है… जब तक ये डेटा सेंटर नहीं आए थे, तब तक हमारी पानी की आपूर्ति बिल्कुल ठीक और विश्वसनीय थी।
एआई और डिजिटल सेवाओं को संचालित करने वाले डेटा सेंटरों के सर्वर चौबीसों घंटे चलते हैं, जिससे भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है। मशीनों को ठंडा रखने के लिए हर दिन लाखों लीटर ताजे पानी की आवश्यकता होती है। नोंगसा विशेष आर्थिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां आम जनता बुनियादी जरूरतों और साफ-सफाई के लिए तरस रही है, वहीं औद्योगिकीकरण और टेक कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रदर्शनों और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए बाटम डेवलपमेंट अथॉरिटी ने डेटा सेंटर डेवलपर्स को पानी के लिए स्थानीय जलाशयों पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वयं के अलवणीकरण संयंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इंडोनेशिया का बाटम द्वीप पूरी तरह से बारिश के पानी और सीमित जलाशयों पर निर्भर है, ऐसे में तकनीकी विस्तार और आम नागरिकों की पानी की मांग के बीच का यह संघर्ष अब एक गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय संकट बनता जा रहा है।