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पूर्व की कई घटनाओँ का उदाहरण देकर डेनमार्क का आरोप

उसकी रक्षा कंपनियों में रूस ने अंतर्घात किये हैं

कोपेनहेगनः बुधवार को डेनमार्क के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कोपेनहेगन में आयोजित एक महत्वपूर्ण घरेलू सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक सनसनीखेज और गंभीर खुलासा किया है। उन्होंने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि रूस ने अब यूक्रेन को हथियार, सैन्य साजो-सामान और उपकरण मुहैया कराने वाली प्रमुख डेनिश कंपनियों को सीधे तौर पर निशाना बनाकर तोड़फोड़ (सबोटेज) के खतरनाक अभियान शुरू कर दिए हैं।

इस खुफिया अधिकारी के अनुसार, डेनिश राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सेवा का मानना है कि यह रणनीतिक बदलाव मॉस्को के चल रहे हाइब्रिड युद्ध अभियान में एक बहुत ही महत्वपूर्ण, आक्रामक और खतरनाक वृद्धि को दर्शाता है। खुफिया एजेंसी द्वारा यह निष्कर्ष निकाला गया है कि रूस ने यह भली-भांति समझ लिया है कि उसके पिछले व्यापक और सामान्य प्रकार के साइबर तथा हाइब्रिड हमलों से नाटो देशों को यूक्रेन का सैन्य समर्थन देने से रोकने में कोई खास या प्रभावी सफलता नहीं मिली है।

इसी विफलता के बाद, अब मॉस्को ने अपनी रणनीति में अमूलचूल परिवर्तन किया है। रूसी नेतृत्व अब सीधे तौर पर उन संवेदनशील लक्ष्यों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है जिनका सीधा और तात्कालिक प्रभाव युद्ध के मोर्चे पर पड़ता है, और इसमें सबसे ऊपर सीधे तौर पर हथियारों का उत्पादन करने वाले कारखाने और औद्योगिक प्रतिष्ठान शामिल हैं।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रूस ने तोड़फोड़ या किसी भी प्रकार के हाइब्रिड युद्ध अभियानों में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से लगातार और कड़ाई से इनकार किया है। कोपेनहेगन स्थित रूसी दूतावास ने बुधवार को इन सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए डेनिश अधिकारियों पर रूस के खिलाफ पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और झूठे दावे करने का कड़ा आरोप लगाया।

खुफिया सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की गुप्त गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रूस तेजी से टेलीग्राम और अन्य लोकप्रिय सोशल मीडिया मंचों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। इसके जरिए ऐसे प्रॉक्सी यानी स्थानीय एजेंटों को किराए पर काम पर रखा जा रहा है, जिन्हें किसी भी प्रकार का विशेष सैन्य या पेशेवर प्रशिक्षण नहीं मिला होता है। इनमें मुख्य रूप से बेघर लोग, आर्थिक तंगी से जूझ रहे व्यक्ति और नशीली दवाओं के आदी लोग शामिल होते हैं। शुरुआत में इन प्यादों को बहुत ही सामान्य और कम खतरे वाले कार्य सौंपे जाते हैं, जैसे कि किसी स्थान की टोह लेना, जासूसी करना या संवेदनशील ठिकानों की फोटोग्राफी करना। एक बार जब वे इन शुरुआती कार्यों में सफल हो जाते हैं, तो धीरे-धीरे उन्हें तोड़फोड़ और आगजनी जैसे बड़े और खतरनाक अभियानों में पूरी तरह से झोंक दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि डेनमार्क की रक्षा खुफिया एजेंसी ने इससे पहले पिछले महीने ही यह चेतावनी जारी की थी कि आने वाले आगामी महीनों में पश्चिमी देशों के खिलाफ रूस द्वारा हाइब्रिड हमलों और गुप्त गतिविधियों की तीव्रता में और अधिक भारी वृद्धि होने की पूरी संभावना बनी हुई है।