ऐसी तदर्थ डीजीपी की व्यवस्था अनिश्चितकाल तक नहीं
इस अस्थायी इंतजाम का मतलब नहीं
विभागीय कामकाज प्रभावित होता है
सरकार इस पर उचित फैसला जल्द ले
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः यह स्पष्ट करते हुए कि तदर्थ व्यवस्था अनिश्चित काल के लिए नहीं चलने दी जानी चाहिए, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा, राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस महानिदेशक के पद पर नियुक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे उद्देश्यों के लिए तदर्थ व्यवस्था को अनिश्चित काल के लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसलिए, हम पंजाब सरकार को इस मामले में उचित निर्णय लेने का आदेश देते हैं।
पीठ ने राज्य को यह भी निर्देश दिया कि अगली तारीख से पहले मुख्य सचिव का हलफनामा दायर करके नियुक्ति के संबंध में लिए गए निर्णय से अदालत को अवगत कराया जाए। ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों के अनुसार पंजाब में एक नियमित डीजीपी की नियुक्ति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर आए हैं।
अधिवक्ता निखिल थम्मन द्वारा पंजाब राज्य और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि पंजाब में पिछले चार साल से अधिक समय से कोई नियमित डीजीपी नहीं है। राज्य पुलिस बल का सर्वोच्च पद इस प्रकार अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था के तहत चल रहा था। थम्मन ने दलील दी कि ऐसी लंबी व्यवस्था से गंभीर संस्थागत चिंताएं पैदा होती हैं, क्योंकि केवल अतिरिक्त प्रभार पर पद संभालने वाला अधिकारी हमेशा संभावित रूप से समझौता करने की स्थिति में हो सकता है, जिसके पास नियमित रूप से नियुक्त डीजीपी के लिए परिकल्पित संस्थागत सुरक्षा और निश्चित कार्यकाल का अभाव होता है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, कानून के शासन और पुलिसिंग में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पुलिस बल के सर्वोच्च स्तर पर स्थिर और स्वतंत्र नेतृत्व आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने प्रकाश सिंह और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 13 मार्च, 2019 के बाद के आदेश का भी हवाला दिया।