ब्रिटेन ने संदिग्धों को रिहा किया, ईरान का खंडन
लंदनः ब्रिटेन और पश्चिमी देशों की सुरक्षा व्यवस्था में उस समय हड़कंप मच गया जब दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में स्थित एक रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण वायुसेना अड्डे (आरएएफ फेयरफोर्ड) के पास एक संदिग्ध बम साजिश का मामला सामने आया। इस सिलसिले में ब्रिटिश आतंकवाद विरोधी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लंदन के रहने वाले पांच ब्रिटिश नागरिकों को गिरफ्तार किया था।
हालांकि, शुरुआती पूछताछ और गहन जांच-पड़ताल के बाद पुलिस ने इन सभी पांचों संदिग्धों को फिलहाल रिहा कर दिया है। यह एयरबेस अमेरिकी सेना द्वारा भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, और पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालातों के बीच अमेरिकी बमवर्षक विमानों के संचालन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा हलकों में भारी हलचल देखने को मिल रही है, क्योंकि शुरुआती दौर में इस पूरी साजिश के तार विदेशी ताकतों से जुड़ने की आशंका जताई जा रही थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस सुरक्षा खतरे की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब बेस के पास कुछ संदिग्ध वाहनों की मौजूदगी की सूचना मिली, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और आसपास के इलाकों को सील कर दिया। चूंकि इस ब्रिटिश एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े अभियानों के लिए किया जाता रहा है, इसलिए ब्रिटिश मीडिया और खुफिया एजेंसियों के बीच इस बात की जोरदार चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या इसके पीछे ईरान या किसी अन्य शत्रु देश का हाथ हो सकता है।
दूसरी ओर, ईरान ने इन तमाम अटकलों और आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। लंदन स्थित ईरानी दूतावास की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी दावों को पूरी तरह से निराधार, दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत करार दिया गया है। तेहरान का यह स्पष्ट कहना है कि इस कथित साजिश से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है और यह केवल उन्हें बदनाम करने का एक प्रोपेगंडा है।
ब्रिटिश अधिकारियों का यह भी कहना है कि हालांकि शुरुआती संदेह के आधार पर गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा कर दिया गया है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आतंकवाद रोधी दस्ते की जांच अभी भी जारी है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियां इस बात का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं कि क्या ये संदिग्ध किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) का हिस्सा थे।
हाल के महीनों में यूरोपीय देशों में शत्रुतापूर्ण गतिविधियों और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते ब्रिटिश सरकार सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि भू-राजनीतिक तनावों के कारण पश्चिमी देशों की घरेलू जमीन पर सुरक्षा के मोर्चे पर कितने गंभीर और चुनौतीपूर्ण हालात पैदा हो सकते हैं।