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प्रदेश भाजपा कार्यालय में अब बदल गये हैं हाव भाव

किसी चेहरे पर धूप तो कहीं दिख रहा छांव

कार्यालय से दूर गुप्त गतिविधियों की चर्चा

लापता चेहरे फिर से वहां नजर आने लगे

दो नेताओं के बीच की दूरी अब भी कायम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन में हुए हालिया बदलाव के बाद से रांची स्थित प्रदेश कार्यालय की तस्वीर और रंगत पूरी तरह बदली-ब बदली नजर आने लगी है। आम तौर पर पिछले कुछ समय से इस मुख्य कार्यालय से दूरी बनाकर चलने वाले कई वरिष्ठ और दिग्गज नेता अब चकाचक खादी की पोशाक में नियमित तौर पर यहां नजर आने लगे हैं।

राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को बहुत गौर से देखा जा रहा है, और यह चर्चा आम है कि पूर्व संगठन मंत्री का निजी एजेंडा और कार्यशैली पार्टी की आंतरिक राजनीति पर किस हद तक हावी थी। अब इस अहम पद पर नए चेहरे के आने से नेताओं और कार्यकर्ताओं दोनों में यह मजबूत उम्मीद बंधी है कि सांगठनिक परिस्थितियों और कार्य संस्कृति में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

बीते कुछ समय से प्रदेश भाजपा कार्यालय का अंदरूनी माहौल पार्टी के कई कद्दावर नेताओं के लिए घुटन भरा और नागवार साबित हो रहा था। राजनीतिक हलकों में इस बात की भी सुगबुगाहट तेज थी कि भले ही वरिष्ठ नेता अपनी गुप्त राजनीतिक गतिविधियों और मुलाकातों को लेकर कितने भी आश्वस्त क्यों न हों, लेकिन कार्यकर्ताओं की पैनी नजरों से कुछ नहीं छिपता।

कौन सा नेता किस होटल में किसके साथ गुप्त बैठकें कर रहा है, और रांची से बाहर के किस होटल का मालिक किस रसूखदार नेता की खातिरदारी में जुटा है—इन तमाम अंदरूनी गतिविधियों की सूचनाएं कार्यकर्ताओं और निचले स्तर तक पहुंच ही जाती थीं।

इसी असहज माहौल और गुटीय गतिविधियों के चलते पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने प्रदेश कार्यालय से व्यावहारिक तौर पर दूरी बना ली थी। स्थिति यह थी कि ये नेता केवल नाममात्र के औपचारिक कार्यक्रमों में ही अपनी हाजिरी लगाने के लिए कार्यालय का रुख करते थे। हालांकि, पिछले तीन दिनों से कार्यालय का यह सुस्त और उदासीन माहौल पूरी तरह बदल चुका है, और वहां एक बार फिर चहल-पहल और रौनक लौट आई है।

संगठन में बदलाव और कार्यालय की रंगत भले ही सुधर गई हो, लेकिन पार्टी के भीतर चल रहे पुराने सियासी समीकरण और व्यक्तिगत दूरियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा अभी भी जोर-शोर से है कि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश के बीच की राजनीतिक और व्यक्तिगत दूरी अब भी जस की तस बनी हुई है।

दिलचस्प पहलू यह है कि एक दौर में संजय सेठ भी प्रदेश कार्यालय में नियमित तौर पर नहीं आते थे, और इन दोनों नेताओं को झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बेहद करीबी यानी ‘किचन कैबिनेट’ का प्रमुख सदस्य माना जाता था। लेकिन समय के साथ राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और आपसी खींचातानी के चलते दोनों नेताओं के रिश्तों में जो खटास और दूरी आई, वह अंदरखाने आज भी उतनी ही गहरी पैठ बनाए हुए है। बहरहाल, नए नेतृत्व के आने से कार्यालय की रौनक तो लौट आई है, लेकिन इन आंतरिक राजनीतिक दूरियों को पाटना नए संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।