अमेरिकी ऊर्जा समझौतों पर टिकी है नई उम्मीदें
काराकासः वेनेजुएला के तेल उद्योग की जन्मस्थली माने जाने वाले छोटे से शहर मेने ग्रांडे में जमीन की दरारों से रिस्ता गाढ़ा काला कच्चा तेल और हवा में घुली गैस की तेज गंध आज भी महसूस की जा सकती है। वेनेजुएला को बदलने वाली तेल क्रांति के एक सदी से भी अधिक समय बाद, यह शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई स्थानीय तेल क्षेत्रों सहित वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा किया है, जिससे इस क्षेत्र के पुनरुद्धार की नई उम्मीदें जगी हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में वाशिंगटन के निवेश को अब तक का सबसे बड़ा सौदा करार देते हुए दावा किया कि इससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुने हो जाएंगे और अगले एक सौ वर्षों के लिए अमेरिकी ऊर्जा प्रभुत्व सुरक्षित रहेगा। हालांकि, ये बड़े दावे मेने ग्रांडे और आसपास के इलाकों की ज़मीनी हकीकत से काफी अलग नजर आते हैं। वर्षों के आर्थिक संकट, अवसंरचना में निवेश की कमी और राजनीतिक उथल-पुथल ने कभी समृद्ध रहे इस क्षेत्र को काफी हद तक बदहाल कर दिया है।
मेने ग्रांडे की वर्तमान 27,000 की आबादी गंभीर बिजली कटौती और टूटते बुनियादी ढांचे के बीच जीवन यापन कर रही है। यहां स्थित ऐतिहासिक ज़ुमाके 1 कुआं, जिसने 1914 में उत्पादन शुरू किया था, आज घटकर मात्र 20 बैरल प्रति दिन का उत्पादन कर पा रहा है। सड़कें खस्ताहाल हैं, सीवेज की समस्याएं आम हैं और रात के समय 17 घंटे तक चलने वाली बिजली कटौती लोगों के जीवन को बेहद कठिन बना देती है।
सामूहिक प्रवास के कारण कई घर खाली पड़े हैं और लोग महंगाई तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान हैं। इसके बावजूद, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों को आशा है कि नए अमेरिकी सौदों और परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा वेनेजुएला के लोगों के लिए समृद्धि वापस आएगी।