ब्रिक्स के दौरान सीधी वार्ता का बेहतर परिणाम मिलने की खबर
रक्षा मंत्रालय ने रिपोर्ट जारी की है
मोदी और शी जिनपिंग की बैठक
सैन्य तनाव के बदले कूटनीतिक संवाद
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः वर्ष 2025 के दौरान भारत की उत्तरी सीमाओं के पास चीनी सैनिकों की तैनाती में आई महत्वपूर्ण कमी ने नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंधों में चल रहे क्रमिक सुधार पर एक मजबूत सैन्य मुहर लगा दी है, क्योंकि दोनों पड़ोसी देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद लगातार तेज हो रहा है।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने इस वर्ष भारत की उत्तरी सीमाओं के सामने अपनी सैन्य तैनाती को कम कर दिया है। यह सकारात्मक विकास दोनों देशों के बीच नए सिरे से हुए कूटनीतिक और सैन्य संपर्कों के साथ सामने आया है। इस रिपोर्ट का महत्व तब और बढ़ जाता है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल बना रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत की उत्तरी सीमाओं के सामने तैनात पीएलए बलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में चीन की ओर से लगभग 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड आकार के बल तैनात थे।
इसके विपरीत, भारत ने सीमा पर अपनी सैन्य सतर्कता और मुस्तैदी पूरी तरह से बरकरार रखी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एलएसी के साथ सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती बेहद मजबूत, संतुलित और किसी भी उभरती हुई आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इससे यह स्पष्ट तस्वीर सामने आती है कि एक तरफ जहां चीन की सैन्य तैनाती में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ भारत की सैन्य तैयारियां पूरी मुस्तैदी के साथ जारी हैं, भले ही दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हों।
रक्षा मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2025 के दौरान भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं का दौर तेजी से आगे बढ़ा, जिसके परिणामस्वरूप उत्तरी सीमाओं पर सकारात्मक विकास और अधिक स्थिरता देखने को मिली है।