मुख्यमंत्री के यूएई दौरे पर भी आरोप प्रत्यारोप जारी
तीन दिवसीय दौरे से लौटे हैं माझी
आठ एमओयू और 16 निवेश प्रस्ताव
विपक्ष ने कहा सिर्फ सैर करने गये थे
प्रसन्न मोहंती
भुवनेश्वरः उत्कर्ष ओडिशा के विजन को वैश्विक फलक पर स्थापित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का तीन दिवसीय यूएई दौरा संपन्न हो चुका है। मुख्यमंत्री के स्वदेश लौटते ही राज्य में विकास की संभावनाओं और राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। सरकारी खेमे में इस यात्रा को ऐतिहासिक सफलता बताया जा रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे महज एक छलावा करार दे रहे हैं।
दुबई और अबू धाबी में आयोजित रोड-शो के दौरान सरकार ने अब तक के सबसे बड़े निवेश प्रस्ताव हासिल करने का दावा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दौरे में कुल 8 एमओयू और 16 निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनकी कुल अनुमानित राशि 2.42 लाख करोड़ रुपये है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से राज्य के करीब 6.18 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। खास बात यह है कि इस बार निवेश का दायरा केवल पारंपरिक खनन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीकों जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, एआई डेटा सेंटर, एलएनजी स्टोरेज, रेयर अर्थ और शिप रिपेयरिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
हालांकि, इन दावों के सामने आते ही मुख्य विपक्षी दल बीजेडी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। बीजेडी का तर्क है कि वर्तमान सरकार जिन निवेशों का श्रेय ले रही है, उनकी ठोस नींव पिछली नवीन पटनायक सरकार के कार्यकाल में ‘मेक इन ओडिशा’ के तहत रखी गई थी। विपक्षी पार्टी का आरोप है कि सरकार केवल बड़े-बड़े आंकड़े पेश कर रही है, जबकि ‘उत्कर्ष ओडिशा’ के तहत आए पुराने प्रस्तावों की जमीनी हकीकत जनता के सामने आनी चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने इस यात्रा को सरकारी खर्चे पर विदेश सैर करार देते हुए तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री को पहले सिंगापुर और अन्य दौरों का श्वेतपत्र जारी करना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पिछले वादों से वास्तव में कितनी फैक्ट्रियां लगीं। ओडिशा जनता कांग्रेस (ओजेसी) ने भी आंकड़े जारी करते हुए दावा किया है कि पिछले वादों का केवल 11 प्रतिशत हिस्सा ही धरातल पर उतर पाया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इन नए निवेशों को जमीन पर उतारकर ओडिशा के बेरोजगार युवाओं को राज्य में ही रोजगार की गारंटी दे पाएगी या यह बहस यूं ही कागजों तक सीमित रह जाएगी।