शोक के दौरान भी प्रदर्शन और कार्यक्रम जारी
मंत्री के निधन पर जारी है शोक
पार्टी ने निर्देश भी जारी किया था
हर कोई अपनी मर्जी का मालिक
राष्ट्रीय खबर
रांचीः कांग्रेस संगठन की तरफ से राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर शोक व्यक्त किया गया था। इसी शोक की वजह से कांग्रेस के कई प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम भी स्थगित कर दिये गये थे। खबर है कि इसका एक निर्देश पत्र भी जारी हुआ है। बावजूद इसके कई पदाधिकारी अपने स्तर पर शोक के दौरान ही अपने अपने कार्यक्रमों के आयोजन में व्यस्त रहे। इससे स्पष्ट है कि अब झारखंड कांग्रेस का घोड़ा बेलगाम दौड़ रहा है। इसके पहले भी पार्टी के दो कद्दावर नेता अपने बड़बोलेपन का लाइव प्रसारण कर फंस चुके हैं। फिर भी लगता है कि पार्टी संगठन पर प्रदेश अध्यक्ष सहित किसी की पकड़ नहीं रह गयी है। आज की बात करें तो मल्लिकार्जुन खडगे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग ने कोतवाली में प्रदर्शन किया। बीच में विवादों में आयी एक पूर्व विधायक भी कांग्रेस के अनुशासन से बाहर जाकर अपना कार्यक्रम आयोजित करने में व्यस्त रही।

रांची के कोतवाली थाना में दिये गये ज्ञापन में कई मुद्दे उठाये गये हैं। जिसमें कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की जातिगत पहचान के कारण उसके किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद स्थान को शुद्ध करने की आवश्यकता बताई जाती है, तो यह केवल एक व्यक्ति के अपमान का विषय नहीं है, बल्कि अनुसूचित जाति समाज के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। तकनीकी और संवैधानक तौर पर यह मांग जायज है पर शोक के दौरान इसका आयोजन सवाल खड़े करता है। ऐसा विरोध प्रदर्शन शोक की अवधि समाप्त होने के बाद भी किया जा सकता था। हजारीबाग इलाके की पूर्व विधायक भी इसी लीक पर चलती रही और उनका अपना कार्यक्रम शोक के दौरान आयोजित किये जाने की जानकारी प्रदेश कार्यालय को है।
इन कार्यक्रमों के अलावा किसी पारिवारिक समारोह में भागीदारी का फोटो भी सोशल मीडिया में प्रसारित कर कांग्रेस के अनुशासन की खिल्ली उड़ायी गयी। दूसरी तरफ नया सवाल खड़ा हो रहा है कि जो प्रदेश कांग्रेस के खिलाफ आवाज उठा रहा है उसकी नाराजगी दूर करने के तमाम प्रयास हो रहे हैं। दशकों से पार्टी की सेवा करने वाले नेताओं के इस्तीफा पर कोई उन्हें मनाने तक का प्रयास नहीं कर रहा है। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि पार्टी में अब अनुशासन बिल्कुल नहीं रह गया है और चंद लोगों के इशारे पर सारा संगठन जिस ओर जा रहा है, वह खाई में गिरने का रास्ता है।