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केंद्रीय गृह मंत्रालय की बैठक में हुए फैसलों पर असमंजस कायम

लद्दाख के संगठनों ने स्पष्टता की मांग कर दी

धारा 370 में नया अध्याय जोड़ा गया है

शासन के अधिकार पर स्पष्टता नहीं

अगले महीने फिर एक बैठक भी होगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ हाल ही में संपन्न उच्च स्तरीय बैठकों के दौर में लद्दाख के प्रमुख प्रतिनिधियों ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए प्रस्तावित चुनी हुई विधायी निकाय में ‘कानून और व्यवस्था’ के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर अपनी गंभीर मांग दोहराई है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि क्षेत्र में कुशल और सुचारू प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए यह बेहद अनिवार्य है कि पुलिस तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े तमाम अधिकार सीधे तौर पर चुनी हुई स्थानीय सरकार के पास हों, ठीक उसी तर्ज पर जैसा कि पुडुचेरी जैसे अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में देखा जाता है।

इस महत्वपूर्ण मसले पर केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत एक नया प्रावधान यानी अध्याय ‘के’ जोड़कर लद्दाख में प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से एक स्वायत्त और चुनी हुई इकाई गठित करने का ठोस प्रस्ताव रखा है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार, इस प्रस्तावित विधायी निकाय को भूमि, स्थानीय संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन पर पूर्ण विधायी, कार्यकारी, बजटीय और वित्तीय शक्तियां सौंपी जाएंगी।

हालांकि, इन अधिकारों के बावजूद लद्दाख के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक कानून-व्यवस्था जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों पर स्थिति अब भी काफी अस्पष्ट बनी हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस विशेष मसले पर अपनी स्थिति पूरी तरह साफ करे ताकि सीमावर्ती क्षेत्र की स्थानीय जनता के मूल अधिकार और हित पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।

इसके अतिरिक्त, बैठक के दौरान लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में यह भी आगाह किया है कि एक लोकतांत्रिक एवं चुनी हुई इकाई के वास्तविक गठन से पहले भूमि हस्तांतरण या मौजूदा शासन तंत्र में कोई भी बड़ा या अपरिवर्तनीय बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। चर्चा के दौरान पिछले विभिन्न आंदोलनों के सिलसिले में दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा प्रभावितों के लिए न्यायोचित मुआवजे के पैकेजों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों के बीच अब आगामी अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में एक और उच्च स्तरीय बैठक तय की गई है, जिसमें एक विस्तृत व अंतिम मसौदा पेश किए जाने की पूरी संभावना है।