इनमें आश्चर्यजनक विद्युत प्रभाव पैदा होता है
राइस विश्वविद्यालय के शोध का नतीजा
फ्लेक्सोइलेक्ट्रिसिटी का नया प्रमाण है यह
अपने कोणों पर बिजली के दो ध्रुव बनाता है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः राइस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिससे पता चला है कि ग्राफीन में मौजूद अत्यधिक सूक्ष्म झुर्रियां सामग्री के विद्युत व्यवहार को पूरी तरह बदल सकती हैं। यह शोध प्रतिष्ठित पत्रिका एडवांस्ड मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ है। यह खोज फ्लेक्सोइलेक्ट्रिसिटी के लिए प्रायोगिक प्रमाण प्रदान करती है, एक ऐसी घटना जिसमें सामग्री को टेढ़ा करने या मोड़ने पर उसमें विद्युत आवेश उत्पन्न हो जाता है।
परमाणु स्तर पर ग्राफीन का अध्ययन ग्राफीन कार्बन परमाणुओं की केवल एक परत से बनी सामग्री है। शोधकर्ताओं ने इसमें प्राकृतिक रूप से बनने वाली झुर्रियों पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें से कुछ मोड़ एक अरबवें मीटर (नैनोमीटर) से भी छोटे क्षेत्र में सिमटे हुए थे। इस अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर, अत्यधिक वक्रता के कारण इलेक्ट्रॉनों का झुकाव ग्राफीन के एक तरफ हो जाता है। मुख्य शोधकर्ता सात्विक अजय अयंगर के अनुसार, यह एक लचीले पैमाने को मोड़ने जैसा है, जहाँ मोड़ इतना तीखा है कि वह एक छोटी बैटरी के दो सिरों की तरह विपरीत विद्युत ध्रुव बना देता है।
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टीम ने इन झुर्रियों के आकार को मापने और विद्युत ऊर्जा व धारा का आकलन करने के लिए विशेष माइक्रोस्कोप प्रोब, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी और कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्राफीन की तीखी झुर्रियां विद्युत स्पीड बंप की तरह काम करती हैं। शोध में सामने आया कि प्रतिक्रिया की ताकत झुर्री की ऊंचाई से अधिक उसके तीखेपन पर निर्भर करती है। इसका ध्रुवीकरण बड़े फ्लेक्सोइलेक्ट्रिक सिस्टम की तुलना में 1 लाख से 1 करोड़ गुना अधिक शक्तिशाली पाया गया।
एक पुरानी भविष्यवाणी का प्रमाण यह खोज वर्ष 2008 में सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी विन्सेंट मेयूनियर द्वारा की गई उस भविष्यवाणी की पुष्टि करती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ग्राफीन को तीखा मोड़ने से इलेक्ट्रॉन पुनर्व्यवस्थित होकर विद्युत प्रतिक्रिया दे सकते हैं। उस समय तकनीक के अभाव में इसे मापना कठिन था, लेकिन अब प्रयोगात्मक डेटा और परमाणु-स्तरीय गणनाओं के मेल ने इस विचार को वैज्ञानिक आधार प्रदान कर दिया है।
भविष्य की तकनीक: अल्ट्राथिन इलेक्ट्रॉनिक्स यह शोध ग्राफीन को बदलने के लिए रासायनिक प्रक्रियाओं के बजाय केवल उसकी संरचना (ज्यामिति) को नियंत्रित करके विद्युत गुणों को ट्यून करने का एक नया रास्ता खोलता है। भविष्य में, यह तकनीक अत्यधिक संवेदनशील सेंसर और अत्यंत पतले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में क्रांतिकारी साबित हो सकती है, जहाँ झुर्रियों को दोष नहीं, बल्कि एक उपयोगी कार्यात्मक विशेषता के रूप में देखा जाएगा।
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