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हरसिमरत कौर ने एनआईए जांच की मांग कर दी

नांदेड़ के प्रसिद्ध गुरुद्वारा में हुआ था जानलेवा हमला

गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा उन्होंने

दो हमलों का आपसी रिश्ता भी जांचा जाए

पंजाब पुलिस की गतिविधियों से संदेह

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: वरिष्ठ अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने रविवार को अपने पति और पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए दो जानलेवा हमलों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पंजाब की राजनीतिक रूप से प्रेरित पुलिस व्यवस्था पर अविश्वास व्यक्त किया है। गृह मंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र में, बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि केवल एक स्वतंत्र केंद्रीय जांच ही घटनाओं की पूरी श्रृंखला का पता लगा सकती है, इसमें शामिल व्यक्तियों और संगठनों की पहचान कर सकती है, किसी भी संभावित चरमपंथी या विदेशी संबंधों की जांच कर सकती है और यह भी देख सकती है कि दोनों हमलों को रोकने में पुलिस की ओर से कोई नाकामी या जानबूझकर ढिलाई बरती गई थी या नहीं।

सुखबीर सिंह बादल पर 13 अगस्त को महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित एक गुरुद्वारे में एक व्यक्ति ने तलवार से हमला किया था। वहीं, 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में उन पर गोली चलाई गई थी। हरसिमरत कौर ने कहा कि इस बात की जांच के लिए एनआईए जांच जरूरी है कि क्या दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं और क्या इनके पीछे कोई बड़ी साजिश है। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है कि गुरुद्वारों में बार-बार हो रहे इन हमलों का मुख्य उद्देश्य इन पवित्र स्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाना और सिख समुदाय तथा पंजाब को बदनाम करना हो सकता है।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब में राजनीतिक रूप से प्रभावित पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लेकर गहरी सार्वजनिक चिंता है। सुखबीर बादल पर हुए दोनों हमलों के हालातों ने यह अनिवार्य कर दिया है कि घटनाओं के पूरे क्रम की जांच पंजाब सरकार से स्वतंत्र किसी एजेंसी द्वारा कराई जाए। वर्तमान में पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार है।

उन्होंने कहा, न तो एक सीमावर्ती राज्य के रूप में पंजाब और न ही एक देश के रूप में भारत, 1980 और 1990 के काले दिनों को वापस लौटने की अनुमति दे सकता है। राजनीतिक हिंसा, धर्म से प्रेरित हिंसा या हत्या के प्रयासों को सामान्य बनाने के किसी भी प्रयास से इसके जड़ जमाने से पहले दृढ़ता और निष्पक्षता के साथ निपटा जाना चाहिए।

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कठोर जांच के नाम पर किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान, प्रताड़ित या फंसाया नहीं जाना चाहिए और इसका मुख्य उद्देश्य केवल सच्चाई को उजागर करना होना चाहिए।