नेतृत्व पर मंडराते संकट के बीच बाल बाल बचे लक्सन
वेलिंगटनः न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बुधवार को घोषणा की कि उन्होंने सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी के सांसदों के बीच हुए विश्वास मत में जीत हासिल कर ली है। आगामी आम चुनावों से कुछ महीने पहले उनके नेतृत्व को लेकर लगातार बढ़ रही अटकलों पर विराम लगाने के उद्देश्य से उन्होंने यह आपात बैठक बुलाई थी।
इस साल अप्रैल में भी विश्वास मत का सामना कर चुके लक्सन की पार्टी को सुस्त आर्थिक विकास के कारण जनमत सर्वेक्षणों में कमजोर समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, कई राजनीतिक चूकों के कारण उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता में भी गिरावट दर्ज की गई है। वेलिंगटन में बुधवार सुबह एक आवश्यक और प्रत्यक्ष बैठक बुलाने के बाद संक्षिप्त बयान में लक्सन ने कहा, आज सुबह हमारे कॉकस की बैठक में मेरे नेतृत्व को लेकर एक विश्वास मत हुआ और मुझे कॉकस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
देश की अर्थव्यवस्था वर्तमान में गंभीर संघर्ष के दौर से गुजर रही है। बेरोजगारी पिछले ग्यारह वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित एक प्रतिशत से तीन प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इन आर्थिक चुनौतियों के कारण नेशनल पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है। हालांकि सात नवंबर को होने वाला चुनाव अभी भी बेहद करीबी बना हुआ है, लेकिन अधिकांश पोल बताते हैं कि नेशनल पार्टी लेबर पार्टी से थोड़ा पीछे चल रही है। बुधवार को जारी एक वन न्यूज वेरियन पोल के अनुसार, प्रधानमंत्री पद के लिए लक्सन की पसंद की रेटिंग एक प्रतिशत घटकर सत्रह प्रतिशत रह गई। हालांकि, इसके बावजूद वह लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस से आगे बने हुए हैं, जिनकी रेटिंग भी एक प्रतिशत गिरकर पंद्रह प्रतिशत पर आ गई है। पार्टी सहयोगियों से बिना चर्चा किए देश की चुनावी प्रणाली पर एक संभावित जनमत संग्रह के संबंध में दिए गए बयानों सहित कई सार्वजनिक भूलों के कारण लक्सन का नेतृत्व एक बार फिर सुर्खियों और आलोचनाओं के घेरे में आ गया था।
एयर न्यूजीलैंड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके लक्सन ने एक व्यावसायिक मंच को संबोधित करते हुए यह भी कहा था कि कारोबारियों को सरकार से मदद मांगने के बजाय वयस्क की तरह व्यवहार करना चाहिए। उनके इस बयान पर भी काफी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम चुनाव से ठीक पहले इस तरह के घटनाक्रम पार्टी के भीतर आंतरिक कलह को उजागर करते हैं, जिससे आगामी चुनावी मुकाबला और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।