जेपीएससी घूसकांड
कई बार की पूछताछ के बाद सीआईडी ने की कार्रवाई
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पूर्व सदस्यों भी हुई है पूछताछ
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समन मिलने के बाद ही पद छोड़ा
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अभी कई और लोग जाल में आयेंगे
राष्ट्रीय खबर
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य की जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। हालात यह हैं कि अब जांच का दायरा केवल शीर्ष पदों और चुनिंदा चेहरों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आयोग के भीतर प्रशासनिक कामकाज और परीक्षा प्रक्रियाओं को संचालित करने वाले अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की भी परत-दर-परत छानबीन शुरू हो चुकी है। अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा उठाए जा रहे इन ताबड़तोड़ और सख्त कदमों के कारण प्रशासनिक गलियारों के साथ-साथ राजनीतिक खेमे में भी भारी सुगबुगाहट और हड़कंप का माहौल देखा जा रहा है।
विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त अंदरूनी जानकारी के अनुसार, सीआईडी इस बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल प्रकरण की जड़ तक पहुंचने के लिए उन तमाम विशिष्ट चेहरों और हस्तियों की कुंडली खंगाल रही है, जो अतीत में आयोग के सर्वोच्च या महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं। इसी रणनीतिक कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, जांच एजेंसी ने जेपीएससी के तीन पूर्व सदस्यों—डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद—को आधिकारिक तौर पर समन जारी कर तलब किया था।
दिलचस्प बात यह रही कि समन मिलने और कानूनी शिकंजा कसने की आहट के बीच इन तीनों पूर्व सदस्यों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, इन्होंने सीआईडी कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लंबी और मैराथन पूछताछ का सामना किया। इस गहन पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने आयोग के दैनिक कामकाज, नीतिगत निर्णयों, और पूर्ववर्ती परीक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े कई तकनीकी और संवेदनशील बिंदुओं पर इनसे तीखे सवाल-जवाब किए।
माना जा रहा है कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष की बहुचर्चित गिरफ्तारी के पश्चात, इस पूरी जांच को एक नया और तीव्र मोड़ मिल गया है। अब सीआईडी की पैनी नजर केवल सदस्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा संचालन, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अन्य निचले व मध्यम स्तर के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका पर भी गहराई से टिकी हुई है।
जांच एजेंसी इस तकनीकी पहलू को गहराई से टटोलने का प्रयास कर रही है कि आखिर विभिन्न चयन और भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान किस स्तर पर नियमों, उपनियमों और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गईं। इसके साथ ही, इस पूरी आपराधिक साजिश या मिलीभगत के खेल में पर्दे के पीछे रहकर डोरियां हिलाने वाले मुख्य सूत्रधारों और बाहरी सहयोगियों की पहचान करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
सीआईडी की इस कड़ी और चौतरफा कार्रवाई से उन तमाम लोगों की मुश्किलें स्वतः ही बढ़ती हुई नजर आ रही हैं, जो आयोग के पिछले कार्यकाल के दौरान विवादास्पद नियुक्तियों, साक्षात्कारों या अन्य प्रशासनिक फैसलों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, जो राज्य की चयन प्रणाली में आम जनता और युवाओं का भरोसा बहाल करने या उसकी कलई खोलने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगे।