राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मी ने इसे अपनी स्वीकृति दी
राष्ट्रीय हंगाम के बाद मोदी की पहल है
अनेक नये प्रावधान जोड़े गये हैं इसमें
पेपर लीक के खिलाफ कड़ी सजा का नियम
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को पेपर लीक विरोधी विधेयक में किए गए संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, पेपर लीक कानून में सजा का प्रावधान अब और अधिक सख्त हो गया है। नए प्रावधान के अनुसार, पेपर लीक मामलों में अब दो महीने के भीतर सजा सुनिश्चित की जाएगी। विधि मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक गजट अधिसूचना में कहा गया कि संसद के दोनों सदनों द्वारा इस सप्ताह पारित किए जाने के बाद राष्ट्रपति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी सहमति दे दी है।
दोषियों को 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माना इस कानून के तहत, पेपर लीक या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों को न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की जेल की सजा होगी, साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। संगठित अपराधों के लिए, संशोधित कानून में न्यूनतम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा था कि यह विधेयक पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को खत्म करने का एक प्रयास है। यह कानून परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता बढ़ाएगा। लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच पारित होने के बाद, शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह विधेयक परीक्षा संबंधी कदाचार को दूर करने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करेगा। इसमें त्वरित अदालतों और जांच के बेहतर तरीकों पर जोर दिया गया है।
राज्यसभा ने गुरुवार को विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच इस विधेयक को पारित किया। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया था। केंद्र सरकार ने यह संशोधन विधेयक नीट विवाद को लेकर हुए राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के कुछ दिनों बाद पेश किया था। यह प्रस्तावित कानून मौजूदा अधिनियम में बदलाव करके पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए सख्त दंड का प्रावधान सुनिश्चित करता है।