गोमूत्र विशेषज्ञ के उल्लेख से सदन में चर्चा में आये थे
मोदी की कमेटी में सदस्य हैं वह
प्रियंका ने कहा था गोमूत्र विशेषज्ञ
अब उनकी पृष्टभूमि की तलाश
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणालियों में सुधार के लिए गठित छह सदस्यीय कार्यबल में शामिल किया गया है। हालांकि, उनका चयन विवादों से घिर गया है। विपक्ष के नेता, जिनमें प्रियंका गांधी वाड्रा और कार्ति चिदंबरम शामिल हैं, उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और एनडीए सुधार की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं।
विवाद की जड़ 2025 में माटू पोंगल के अवसर पर दिया गया उनका एक भाषण है, जिसमें उन्होंने गाय के मूत्र से बुखार ठीक होने के एक संन्यासी के किस्से का उल्लेख किया था। इसी टिप्पणी के कारण विपक्ष उन पर गोमूत्र विशेषज्ञ होने का तंज कस रहा है और इसे छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने वाला बता रहा है। गौरतलब है कि कामाकोटी ने कभी आईआईटी मद्रास में गाय के मूत्र पर कोई शोध नहीं किया है और न ही उनकी व्यक्तिगत आस्था उनके पेशेवर काम में आड़े आई है।
कामाकोटी की पृष्ठभूमि काफी अलग है; उन्होंने कभी जेईई पास नहीं की और उनके पास पासपोर्ट भी नहीं है। वर्तमान में, वे एनडीए में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी, एस. सोमनाथ और तपन डेका जैसे दिग्गजों के साथ काम कर रहे हैं। नीट लीक मामले पर कामाकोटी का मानना है कि समस्या केवल तकनीक की नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे की है। उनके अनुसार, भारत में एक सत्र में अधिकतम 3 लाख उम्मीदवारों की परीक्षा कराने की क्षमता है, जबकि नीट में 22 लाख छात्र बैठते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार नीट में समस्या छपाई या वितरण से पहले ही उत्पन्न हो गई थी।
विपक्ष का यह हमला तब और तेज हो गया जब उन्होंने सांसद में कामाकोटी की योग्यता पर निशाना साधा। यह तीसरी बार है जब उनके 2025 के भाषण को लेकर उन्हें राष्ट्रीय बहस में घसीटा गया है। पहली बार यह टिप्पणी सामने आने पर और दूसरी बार 2026 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किए जाने के दौरान भी उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इन तमाम विवादों के बीच, कामाकोटी का ध्यान अब एनडीए की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने और भविष्य में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को रोकने पर केंद्रित है।