भोपाल (मध्य प्रदेश): दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों के लिए मुख्य आकर्षण रहे पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का इस बार प्रत्याशी के रूप में टिकट काट दिया गया।
हालांकि, एक अनुशासित मतदाता के रूप में नरोत्तम मिश्रा ने मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वोट डालने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने भाजपा के चुनाव चिह्न ‘कमल’ पर बटन दबाकर पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को विजयी बनाने के लिए मतदान किया है। इस दौरान उनके चेहरे के भाव और हाव-भाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने रहे।
🗳️ क्या दतिया में नरोत्तम का यह आखिरी मतदान? जीत और हार दोनों स्थितियों में फंसा सियासी भविष्य
दतिया विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में यह पहला ऐसा चुनाव माना जा रहा है, जिसमें भाजपा के घोषित प्रत्याशी से अधिक चर्चा उस दिग्गज नेता की हो रही है, जिसका टिकट काटा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। यदि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी चुनाव जीतते हैं, तो पार्टी को दतिया में एक नया युवा नेतृत्व मिल जाएगा। दूसरी ओर, यदि भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ता है, तो हार की जिम्मेदारी का एक हिस्सा नरोत्तम मिश्रा के सिर भी आ सकता है। ऐसे में यह उपचुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से काफी संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है।
💬 “जिसकी मस्ती जिंदा है, उसकी हस्ती जिंदा है…” मीडिया के सवाल पर नरोत्तम मिश्रा का शायराना अंदाज
वोटिंग के बाद जब मीडिया ने नरोत्तम मिश्रा से उनकी वर्तमान स्थिति और भविष्य की भूमिका को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा, “जिसकी मस्ती जिंदा है.. उसकी हस्ती जिंदा है.. वरना जबरदस्ती जिंदा है।”
उन्होंने कहा कि दतिया के मतदाता विकास और रोजगार के मुद्दे पर मतदान कर रहे हैं। केंद्र व राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार ही क्षेत्र में नए उद्योग ला सकती है, जिससे दतिया के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े। मतदान प्रतिशत कम रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्षेत्र में उमस व गर्मी अधिक है, और अक्सर दतिया में बहन-बेटियां दोपहर बाद ही मतदान के लिए निकलती हैं।
🏛️ भाजपा में नए नेतृत्व का दौर: क्या ‘मार्गदर्शक मंडल’ की ओर बढ़ रहे हैं मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता?
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर हो रहे रणनीतिक बदलावों के बीच पुराने क्षत्रपों की भूमिका सीमित होती दिख रही है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पवन देवलिया के अनुसार, “भारतीय जनता पार्टी में जिस तरह से नए प्रयोग किए जा रहे हैं और नए नेतृत्व को आगे लाया जा रहा है, उससे आने वाले समय में कई वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय राजनीति से विदाई के संकेत मिलते हैं।” उन्होंने संभावना जताई कि मध्य प्रदेश में भी जल्द ही एक प्रकार का ‘मार्गदर्शक मंडल’ बन सकता है, जिसमें राज्य के कई उम्रदराज और वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जा सकता है।