बिहार में फिर से लागू हुआ जोनल सिस्टम
विधि व्यवस्था मजबूत करने की कवायद
अब आईजी अफसर करेंगे सीधी निगरानी
सात साल बाद पुरानी व्यवस्था की वापसी
दीपक नौरंगी
पटनाः बिहार सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। 7 वर्षों के अंतराल के बाद बिहार पुलिस में जोनल व्यवस्था को पुन: लागू कर दिया गया है। गृह विभाग की नई अधिसूचना के अनुसार, राज्य की मौजूदा 12 पुलिस रेंज को अब चार मुख्य जोनों—पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर में पुनर्गठित किया गया है।
नेतृत्व और पुलिस मुख्यालय की पहल पर यह संरचनात्मक सुधार किया गया है, जिसमें डीजीपी विनय कुमार की टीम ने नई व्यवस्था का खाका तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक ढांचा इस प्रकार होगा। प्रत्येक जोन की कमान पुलिस महानिरीक्षक के पास होगी। रेंज प्रमुख: प्रत्येक जोन के अंतर्गत आने वाली 3-3 पुलिस रेंज का नेतृत्व पुलिस उपमहानिरीक्षक करेंगे। रेल पुलिस की व्यवस्था पहले की तरह ही स्वतंत्र रहेगी। जिला स्तर पर डीआईजी और जोनल स्तर पर आईजी की निगरानी से पुलिस प्रशासन में दोहरी मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू होगी।
जोनों का भौगोलिक विभाजन इस प्रकार किया गया है। पटना जोन: केंद्रीय क्षेत्र (पटना), मगध क्षेत्र (गया), और शाहाबाद क्षेत्र (डेहरी-ऑन-सोन)। मुजफ्फरपुर जोन: तिरहुत क्षेत्र (मुजफ्फरपुर), चंपारण क्षेत्र (बेतिया), और सारण क्षेत्र (छपरा)। दरभंगा जोन: मिथिला क्षेत्र (दरभंगा), कोशी क्षेत्र (सहरसा), और पूर्णिया क्षेत्र। भागलपुर जोन: पूर्वी क्षेत्र (भागलपुर), मुंगेर क्षेत्र, और बेगूसराय क्षेत्र।
वर्ष 2019 में जोनल व्यवस्था को समाप्त कर 12 स्वतंत्र पुलिस रेंज बनाए गए थे। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना था कि केवल रेंज-आधारित व्यवस्था से बढ़ती आबादी, बड़े भौगोलिक क्षेत्र और कानून-व्यवस्था की बदलती चुनौतियों से सही तरीके से नहीं निपटा जा पा रहा था।
डीजीपी विनय कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों की राय के बाद सरकार ने इसे पुनः लागू किया है। इस व्यवस्था से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी क्षमता बढ़ेगी, अंतर-जिला समन्वय मजबूत होगा, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा। साथ ही, आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित निवारण होगा और पुलिस महकमे में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी। जरूरत पड़ने पर नए पदों के सृजन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।