छात्र विरोध प्रदर्शन एवं हिंसा की निष्पक्ष जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालयने आज सुनवाई के दौरान यह महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की कि पिछले सप्ताह देश भर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान विद्यार्थियों और पुलिस अधिकारियों को आई चोटों एवं हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष, पारदर्शी तथा स्वतंत्र जांच कराई जानी अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय ने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन के अधिकारों और कानून-व्यवस्था के संतुलन के साथ-साथ पुलिस बल तथा प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों की सुरक्षा एवं जवाबदेही तय होना अनिवार्य है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक घटनाओं की गहराई से और किसी बाह्य प्रभाव से मुक्त जांच नहीं होगी, तब तक वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकती। विद्यार्थियों द्वारा पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के लगाए गए आरोपों तथा पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा व तोड़फोड़ के दावों, दोनों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके।
उच्चतम न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त जज) की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन कर सकता है। न्यायालय का मानना है कि किसी तटस्थ और उच्च न्यायिक अनुभव वाले व्यक्ति के मार्गदर्शन में गठित एसआईटी ही इस बहु-राज्यीय मामले की बिना किसी पक्षपात के स्वतंत्र जांच सुनिश्चित कर सकती है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार (संघ), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं केरल राज्यों के प्रशासनिक तंत्र से औपचारिक रूप से जवाब मांगा है। न्यायालय ने इन सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर इस विषय पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में फैली इन घटनाओं की व्यापक समीक्षा की जा सके।