Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mukesh Sharma ने कांवड़ सेवा शिविर में युवाओं से सेवा और सामाजिक दायित्व निभाने का किया आह्वान राहुल गांधी की पोस्ट पर किरेन रिजिजू का पलटवार, कहा— "राहुल की सोच बदली, उम्मीद है महिला आरक्षण बिल ... पेट्रोल-डीजल के ताज़ा रेट जारी: दिल्ली, मुंबई से पटना तक जानें 8 अगस्त के दाम; क्रूड ऑयल पर ईरान-ओमा... जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ CIK का बड़ा एक्शन, सिम कार्ड दुरुपयोग और UAPA मामलों में कई जिलों ... कर्नाटक के कलबुर्गी में बाढ़ से बिगड़े हालात, उफनती कमलावती नदी में ट्रैक्टर पर शव ले जाकर हुआ अंतिम... बरेली में गजब कारनामा: संदिग्ध परिस्थितियों में गायब महिला दूसरे समुदाय के युवक के घर डबल बेड के नीच... कानपुर देहात में प्रेमी जोड़े को तालिबानी सजा: रस्सी से बांधकर लाठी-डंडों से पीटा, वीडियो वायरल होने ... यूपी में सियासी घमासान: "सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है"— मायावती और बृजेश पाठक का अखिलेश यादव पर ती... कांवड़ यात्रा नियम: सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने के बाद भी रखें इन बातों का ध्यान, न करें ये गलतियां कश्मीरी विस्थापितों की वापसी पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट: सुरक्षा व आजीविका के आकलन का निर्देश, मिलेगा...

मणिपुर के पूर्व मुख्य न्यायाधीश विवादों में घिरे

अपने जज रहते हुए ही एलपीजी डीलरशिप लेने का आरोप

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मणिपुर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उन पर अपने 16 वर्ष के लंबे न्यायिक सेवा कार्यकाल के दौरान किचन फ्लेम नामक एक एलपीजी गैस डीलरशिप से व्यावसायिक रूप से जुड़े रहने का गंभीर आरोप लगा है। इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के आगामी चुनाव में उनकी दावेदारी की संभावनाओं को भी बड़ा झटका लगा है।

यह पूरा विवाद तब सामने आया जब इस गैस एजेंसी के एक पूर्व प्रबंधक की पत्नी ने एजेंसी के स्वामित्व को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद एक आम नागरिक ने भी इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। इन गंभीर शिकायतों के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सेवानिवृत्त जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जब उनकी तरफ से इस नोटिस का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो बीपीसीएल ने कड़ी कार्रवाई करते हुए बीते 6 जुलाई को इस गैस एजेंसी की डीलरशिप को निलंबित कर दिया।

भारतीय न्यायपालिका में न्यायाधीशों के लिए आचरण और नैतिकता के कड़े मापदंड तय किए गए हैं। नियमों के अनुसार, सेवारत न्यायाधीशों के किसी भी प्रकार के निजी व्यावसायिक उपक्रमों, निजी कंपनियों या सार्वजनिक उपक्रमों में कोई भी पद धारण करने या उनसे प्रत्यक्ष लाभ कमाने पर सख्त प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध इसलिए लागू किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर हितों का टकराव न हो और न्यायपालिका की निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और स्वतंत्रता पूरी तरह से अक्षुण्ण बनी रहे।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने अपने कानूनी करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में दिल्ली हाईकोर्ट से बतौर वकील की थी। उनके लंबे कानूनी अनुभव को देखते हुए मार्च 2008 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद, अक्टूबर 2023 में उन्हें पदोन्नत कर मणिपुर हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था, जहां से वे सेवानिवृत्त हुए। अब सेवाकाल के दौरान व्यावसायिक गतिविधि में कथित संलिप्तता के इन आरोपों ने उनके पूरे करियर और भविष्य की योजनाओं पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।