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अब सस्ता होगा आपका डेली लंच: स्विगी और ज़ोमैटो की ‘वैल्यू मील’ स्ट्रैटेजी से बदलेगी फूड डिलीवरी की दुनिया

अगर आप भी ऑफिस में रोजाना खाना ऑर्डर करने का सोचते हैं, लेकिन 400-500 रुपये का भारी बिल देखकर अपना इरादा बदल लेते हैं, तो अब चिंता छोड़िए। स्विगी और ज़ोमैटो जैसी प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियां अब आपका रोज़ का लंच वाला ऑर्डर हथियाने की तैयारी में हैं। इन कंपनियों का पूरा फोकस अब महंगे खान-पान से हटकर 200 रुपये की ‘वैल्यू मील’ (किफायती थाली) पर आ गया है। उनका लक्ष्य ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग को खास मौके से बदलकर आपकी रोज़मर्रा की आदत बनाना है।

🕒 रोज़ाना के ऑर्डर पर कंपनियों की नजर

डेटम इंटेलिजेंस के संस्थापक सतीश मीना के अनुसार, कंपनियों की मंशा अब सिर्फ एक बार का ऑर्डर नहीं, बल्कि आपको अपने प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह निर्भर करना है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए डिलीवरी चार्ज और टैक्स मिलाकर बिल 200 से 250 रुपये के दायरे में रहना चाहिए। इसी डिमांड को देखते हुए फास्ट-फूड कंपनियां भी अपने मेन्यू में किफायती विकल्पों को तेजी से जोड़ रही हैं।

⚙️ स्विगी और ज़ोमैटो की अलग-अलग रणनीतियां

इस बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए स्विगी लगातार प्रयोग कर रही है। कंपनी ने ऐप में ‘वैल्यू स्टोर’ शुरू किया है और ‘टोइंग’ (Toing) नामक एक कम बजट वाला ऐप भी टेस्ट कर रही है। स्विगी के सीईओ श्रीहर्ष मजेटी का मानना है कि भविष्य की ग्रोथ किफायती दामों वाले खाने से ही आएगी। दूसरी ओर, ज़ोमैटो ने फिलहाल कोई अलग सस्ता ऐप न लाने का फैसला किया है, लेकिन कंपनी चुनिंदा इलाकों में खास डिस्काउंट और ‘बिस्ट्रो’ मॉडल के जरिए ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही है।

🚀 नए खिलाड़ियों का अलग दृष्टिकोण

बाजार में केवल पुरानी कंपनियां ही नहीं, बल्कि ‘ओनली’ (Ownly) जैसे नए खिलाड़ी भी मैदान में हैं। यह कंपनी रेस्तरां से कमीशन नहीं लेती, जिससे रेस्तरां खुद खाने की कीमतें तय कर सकते हैं और ग्राहक डिलीवरी शुल्क अलग से चुकाते हैं। वहीं, रिबेल फूड्स और क्योरफूड्स जैसी कंपनियां ‘मल्टी-ब्रांड’ रणनीति अपना रही हैं, जहाँ वे अलग-अलग बजट के हिसाब से प्रीमियम से लेकर किफायती ब्रांड्स (जैसे ईटफिट, केकज़ोन) पेश कर रही हैं।

📈 27 अरब डॉलर तक पहुंचेगा बाजार

इन्वेस्टेक इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट अब अगले बड़े पड़ाव पर है। यह ग्रोथ नए ग्राहकों के आने के साथ-साथ मौजूदा ग्राहकों द्वारा बार-बार ऑर्डर करने और छोटे शहरों में बढ़ती मांग से आ रही है। अनुमान है कि साल 2024 का 9.1 अरब डॉलर का यह बाजार 2030 तक बढ़कर 27 अरब डॉलर का हो जाएगा। जैसे-जैसे शहरीकरण और कामकाजी वर्ग बढ़ रहा है, लोगों की खाने-पीने की आदतें भी तेजी से बदल रही हैं।