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राम मंदिर दान मामले में एसआईटी जांच तेज

भाजपा की चुप्पी के बाद भी तीखी बयानबाजी जारी

  • बैंक के रिकार्ड हासिल किये गये

  • जमीन के दस्तावेज भी खंगाले गये

  • संसद में जरूर होगा इस पर हंगामा

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, उससे जुड़े दान और जमीनी सौदों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर गठित विशेष जांच दल ने अपनी कार्रवाइयों को काफी तेज कर दिया है। एसआईटी की विशेषज्ञ टीम इस समय मंदिर ट्रस्ट के बैंक खातों, दान के आधिकारिक दस्तावेजों, भूमि खरीद की रजिस्ट्रियों और सभी डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड्स को बारीकी से खंगाल रही है। इस जांच के दायरे में आने के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में भारी भूचाल आ गया है।

आगामी संसद सत्र और चुनावों को देखते हुए विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष इस मामले को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और करोड़ों सनातनी जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ बताकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखे निशाने साध रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी सीधे तौर पर सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि दान के पैसे का दुरुपयोग एक गंभीर अपराध है, इसलिए इस पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

दूसरी तरफ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे सांस्कृतिक व धार्मिक संगठनों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि ये आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं और इनका एकमात्र उद्देश्य राम मंदिर व उससे जुड़े संगठनों की छवि को धूमिल करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वायत्त संस्था है और जांच एजेंसियां बिना किसी राजनीतिक दबाव के पूरी निष्पक्षता से अपना काम कर रही हैं। सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस संवेदनशील और धार्मिक विषय पर किसी भी दल को अपनी राजनीतिक रोटियां नहीं सेकनी चाहिए।

राम मंदिर का मुद्दा दशकों से भारत की राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु रहा है। ऐसे में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों और संसद सत्र से ठीक पहले एसआईटी की इस बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक दलों को एक-दूसरे पर हमला करने का एक और बड़ा और संवेदनशील हथियार दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में एसआईटी की यह जांच रिपोर्ट न केवल कानूनी मोड़ लेगी, बल्कि देश की आगामी राजनीति की दिशा और दशा तय करने में भी बेहद अहम भूमिका निभाएगी। दोनों ही पक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश करेंगे।