तीन राज्यसभा सीटों के उपचुनावों का एलान
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तीन सांसदों ने इस्तीफा दिया था
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भाजपा के पास पूरा संख्याबल है
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सत्र में ताकत और बढ़ेगी सरकार की
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक घमासान के बीच तीन बागी नेताओं ने राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया है और पार्टी भी छोड़ दी है। इन बागियों के इस्तीफे के बाद खाली हुई तीन सीटों पर कौन सांसद बनेगा, इसे लेकर कयासों का बाजार पहले से ही गर्म था। अब चुनाव आयोग ने इन सीटों पर उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आगामी 24 जुलाई को राज्यसभा की इन तीन सीटों के लिए उपचुनाव होंगे।
विधानसभा चुनाव में तृणमूल की करारी हार के बाद पार्टी में टूट लगातार गहराती जा रही है। विधानसभा में विधायक दल टूट चुका है, तो लोकसभा में संसदीय दल से अलग होकर बागी नेताओं ने नए दल का दामन थाम लिया है। अब राज्यसभा में भी तृणमूल के तीन बागी सांसदों— सुखेंदु शेखर राय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस तरह चालू महीने में ही इन तीनों सीटों पर उपचुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
तृणमूल में मची इस भगदड़ के दौरान सबसे पहले सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दिया था, जिससे 8 जून से यह सीट खाली है। इसके बाद 10 जून को सुस्मिता देव और 11 जून को प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी। इस्तीफे के बाद प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जमकर तारीफ की थी। वहीं, सुस्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ बैठक की, जबकि सुखेंदु शेखर राय को लोकसभा में तृणमूल के बागी नेताओं के साथ बैठक करते देखा गया।
सोमवार को चुनाव आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल की इन तीन सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होगा। इसके लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 14 जुलाई है। नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) 15 जुलाई को होगी और नाम वापसी की अंतिम तिथि 17 जुलाई तय की गई है। आयोग ने बताया कि 24 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, जिसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया को 27 जुलाई तक संपन्न करना होगा।
राज्य विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें तो तीनों ही सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत की संभावना सबसे अधिक है। विधानसभा में इस समय भाजपा के पास 208 सीटें हैं। यदि भाजपा राज्यसभा उपचुनाव में तीन उम्मीदवार उतारती है और उनके वोट एकजुट रहते हैं, तो भगवा खेमे के प्रत्याशियों को क्रमशः 70, 69 और 69 वोट मिल सकते हैं। इसके अलावा यदि क्रॉस वोटिंग होती है, तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
ऐसे में भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए विपक्ष के किसी भी प्रत्याशी को कम से कम 70 वोटों की जरूरत होगी। विधानसभा में तृणमूल की कुल ताकत 80 विधायकों की है, लेकिन तृणमूल का विधायक दल दो धड़ों में बंटा हुआ है। यदि तृणमूल के दोनों गुट मिलकर किसी एक उम्मीदवार को चुनते हैं, तभी वे एक सीट हासिल कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसकी संभावना बेहद कम नजर आ रही है।