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चंदा चोरी का मामला पकड़ में आने के बाद जगा प्रबंधन

बिना जेब वाली पोशाक और कई दौर की चेकिंग

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः दान चोरी के कथित मामले को लेकर चल रहे आरोपों के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नकदी गिनने की प्रक्रिया में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। ट्रस्ट द्वारा किए गए सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है—कैश गिनने वाले सभी कर्मचारियों के लिए नई यूनिफॉर्म की शुरुआत। गिनती करने वाले स्टाफ को गहरे नीले रंग के पूरी तरह से सील कबरहॉल (कवरऑल) दिए गए हैं, जिनमें जिपर लगे हैं और कोई जेब (पॉकेट) नहीं है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि गिनती के दौरान नकदी छिपाने की किसी भी गुंजाइश को खत्म किया जा सके।

ट्रस्ट ने गिनती की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। पहले जहां दान की राशि को मेज पर गिना जाता था, वहीं अब इस प्रक्रिया को कड़ी निगरानी के बीच फर्श पर स्थानांतरित कर दिया गया है। सूत्रों ने जानकारी दी कि सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत कर दी गई है और गिनती की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एसआईएस सुरक्षा के पांच जवान तैनात किए गए हैं। दान चोरी का मामला सामने आने के बाद गिनती केंद्र पर दो पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है।

ट्रस्ट ने प्रवेश प्रोटोकॉल को भी कड़ा कर दिया है। कैश काउंटिंग में लगे कर्मचारियों को अब तीन अलग-अलग एंट्री चेकिंग से गुजरना होगा, जिसमें दो अलग-अलग चौकियों पर की जाने वाली शारीरिक तलाशी शामिल है। इस पूरी कवायद की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है ताकि पूर्ण पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

जांच के दौरान चंपत राय और कृष्ण मोहन पहले ही एक बार अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। जांचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या यह कथित चोरी किसी संगठित रैकेट (गिरोह) के रूप में काम कर रही थी। हालांकि, वे अभी तक यह पहचान  नहीं पाए हैं कि इस पूरे खेल को किसने संचालित किया, क्योंकि आरोपी एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं।

मंदिर के गिनती क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज बरामद करने के बाद पुलिस घटनाक्रम के पैटर्न का विश्लेषण कर रही है। सूत्रों ने उल्लेख किया है कि फुटेज से संकेत मिलता है कि एक निश्चित समय अवधि (टाइम विंडो) के दौरान निगरानी इकाई से सुरक्षाकर्मी गायब थे, और आशंका है कि इसी दौरान कथित चोरी को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी पाया गया है कि काउंटिंग एरिया को कवर करने वाला सीसीटीवी सिस्टम पूरी तरह से ट्रस्ट के नियंत्रण में था।