लातेहार: जिले के ग्रामीण इलाकों में करीब एक दशक पहले हुए अवैध खनन के निशान आज भी मौत का जाल बनकर बिछे हुए हैं। फायर क्ले के अवैध उत्खनन के दौरान खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढे अब राहगीरों और ग्रामीणों के लिए खतरा बन गए हैं। प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन गड्ढों को न तो भरा गया है और न ही इनके आसपास सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं, जिससे लगातार हादसों की खबरें सामने आ रही हैं।
🚧 पक्की सड़कें बनीं खतरे का केंद्र
एक दशक पहले जब इन इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव था, तब लूटी गांव समेत कई क्षेत्रों में फायर क्ले का बड़े पैमाने पर अवैध खनन होता था। उस समय आवागमन कम था, लेकिन अब पक्की सड़कें बन जाने के बाद यहां लोगों और वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। सड़क किनारे बने ये गड्ढे इतने गहरे हैं कि इनमें गिरना किसी बड़े हादसे को न्योता देने के बराबर है।
📢 ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की गुहार
स्थानीय ग्रामीण सूरज उरांव और पंचायत समिति सदस्य सीता कुमारी ने चिंता जताते हुए कहा कि नशे की हालत में या असावधानी के कारण अक्सर लोग इनमें गिर जाते हैं, जिससे अब तक कई मौतें भी हो चुकी हैं। ग्राम प्रधान जेठा उरांव ने बताया कि उत्खनन के समय नक्सलियों के डर से ग्रामीण विरोध नहीं कर सके थे, लेकिन अब यह खतरनाक गड्ढे बच्चों और ग्रामीणों के लिए हर पल मौत का साया बने हुए हैं।
⚖️ प्रशासन का रुख और जांच के आदेश
सांसद प्रतिनिधि अमलेश कुमार सिंह ने जिला प्रशासन से इन गड्ढों को तत्काल भरने या बैरिकेडिंग कर सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इस गंभीर मामले पर एसडीएम दिनेश कुमार ने कहा कि प्रशासन द्वारा खतरनाक गड्ढों की जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में कोई बड़ी घटना न हो।