भाजपा को सदन में दो तिहाई बहुमत का असली राज क्या
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अन्य दलों में तोड़फोड़ इसी वजह से
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चार सौ पार का नारा इसका हिस्सा
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सारा खेल सीधे अमित शाह कर रहे
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी पर संविधान और आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। रमेश ने दावा किया कि लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के पीछे भाजपा का असली और अंतिम लक्ष्य संविधान में संशोधन करना और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण को समाप्त करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का तात्कालिक उद्देश्य परिसीमन से संबंधित कानून पारित करना है, ताकि वह संसद में संविधान के प्रावधानों को बदलने के लिए पर्याप्त संख्या बल जुटा सके। रमेश के अनुसार, भाजपा का 400 पार का नारा इसी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष में तोड़-फोड़ की राजनीति कर रहे हैं ताकि लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (जो लगभग 348 सीटों की आवश्यकता होती है) प्राप्त किया जा सके। रमेश ने कहा कि टीएमसी और शिवसेना जैसी पार्टियों को तोड़ने के बावजूद भाजपा अभी भी इस लक्ष्य से दूर है।
आरक्षण के मुद्दे पर रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों के विपरीत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और आरएसएस के कुछ नेताओं के पुराने बयानों का हवाला दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा महिला आरक्षण विधेयक का विरोध परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ था, न कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व के खिलाफ। उन्होंने मांग की कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 2029 के चुनावों के लिए लागू करे।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेताओं पर रमेश ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सत्ता का सुख भोगने के बाद पार्टी छोड़ी, उन्हें वापस नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस के मौजूदा सदस्य विचारधारा से जुड़े हुए हैं।
युवाओं से जुड़े मुद्दों पर रमेश ने कहा कि हालांकि छात्र आंदोलनों ने युवाओं के आक्रोश को आवाज दी है, लेकिन लोकतंत्र में परिवर्तन का नेतृत्व अंततः स्थापित राजनीतिक दलों को ही करना होगा। उन्होंने नीट और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के विरोध में राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान का समर्थन किया और कहा कि कांग्रेस शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने और कोचिंग सेंटरों पर परिवार के बढ़ते खर्च जैसे बुनियादी सवालों को संसद और बाहर मजबूती से उठाती रहेगी।