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एक सप्ताह से सीमा पर फंसे हैं सुपारी लदे ट्रक

महाराष्ट्र ने कर्नाटक की गाड़ियों को रोका

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरः महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने कर्नाटक से आ रही सुपारी लदी 55 से अधिक लॉरियों को पिछले एक सप्ताह से हिरासत में ले रखा है। 11 जून, 2026 से जारी इस कार्रवाई के तहत सोलापुर, औरंगाबाद, बीड और नांदेड़ के राजमार्गों पर इन ट्रकों को रोककर जांच की जा रही है। इन ट्रकों में कर्नाटक की प्रमुख सुपारी सहकारी समितियों जैसे शिवमोगा की मैमकोस, मंगलुरु की कैम्पको और हासन की हासन सुपारी उत्पादक सहकारी समिति का माल लदा हुआ है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने इन लॉरियों से सुपारी के नमूने लिए हैं और उन्हें प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजा है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या सुपारी में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया गया है और क्या ये उपभोग के लिए सुरक्षित हैं। विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि प्रयोगशाला के परिणाम में सुपारी मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाई जाती है, तो पूरे माल को तुरंत मौके पर ही नष्ट कर दिया जाएगा और संबंधित व्यापारियों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।

यदि नमूने परीक्षण में सुरक्षित पाए जाते हैं, लेकिन सुपारी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से कम होती है, तो संबंधित पक्षों पर जुर्माना लगाया जाएगा और मुकदमा चलाया जाएगा।

लॉरी ऑपरेटरों और सहकारी समितियों ने इस कार्रवाई के कारण हो रही भारी परेशानी पर चिंता व्यक्त की है। मैमकोस के प्रबंध निदेशक श्रीकांत बरुआ ने बताया कि उन्होंने सोलापुर के सहायक आयुक्त से मुलाकात कर लॉरियों को मुक्त करने का अनुरोध किया है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

शिवमोगा के एक लॉरी चालक ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला परिणामों के आने में 14 दिन लग सकते हैं। यदि प्रक्रिया में देरी होती है, तो हमें इतने दिनों तक यहाँ रुकने के लिए मजबूर किया जा रहा है। माल के खराब होने के डर और परिवहन लागत बढ़ने से ट्रक मालिकों और सुपारी उत्पादकों में भारी रोष है। वे इस अनिश्चितकालीन देरी को व्यापार के लिए नुकसानदेह मान रहे हैं। फिलहाल, सभी संबंधित पक्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जो यह तय करेगी कि इन सैकड़ों टन सुपारी का भविष्य क्या होगा।