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यूरोपीय संघ का नया सख्त आव्रजन कानून

यूरोपीय संसद ने विचार के उपरांत नये कानून को मंजूरी दी

एजेंसियां

बर्लिनः यूरोपीय संसद ने आज एक ऐतिहासिक और विवादास्पद मतदान के माध्यम से अवैध प्रवासियों के प्रबंधन हेतु एक अत्यंत कठोर कानून को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। यह विधायी कदम यूरोपीय संघ (EU) के इतिहास में माइग्रेशन नीतियों के सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है। इस नए कानून का प्राथमिक और घोषित उद्देश्य यूरोपीय सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाना और अनियंत्रित अवैध आव्रजन के प्रवाह को पूरी तरह से नियंत्रित करना है। संसद में पारित इस प्रस्ताव ने पूरे महाद्वीप में एक तीखी बहस छेड़ दी है, क्योंकि यह प्रवासियों के प्रति यूरोप के उदार दृष्टिकोण को एक सुरक्षा-केंद्रित नीति में परिवर्तित करने का संकेत देता है।

इस कानून के तहत सबसे अधिक चर्चित और विवादास्पद प्रावधान यूरोपीय संघ की सीमाओं के बाहर रिटर्न हब की स्थापना करना है। ये केंद्र उन प्रवासियों के लिए बनाए जाएंगे जिनके शरण संबंधी आवेदनों को कानूनी प्रक्रिया के बाद अस्वीकार कर दिया गया है। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य इन व्यक्तियों को मुख्य यूरोपीय भू-भाग से दूर रखकर उन्हें उनके मूल देशों में वापस भेजने की प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और तीव्र बनाना है। आलोचकों का तर्क है कि ये हब प्रवासियों को एक तरह की कानूनी शून्यता में डाल देंगे, जहाँ उनके मानवीय अधिकारों का हनन हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, नए कानून में अवैध प्रवासियों के लिए जेल की सजा के प्रावधानों को काफी अधिक कठोर कर दिया गया है। पहले की तुलना में, सीमा पार करने के अनधिकृत तरीकों और कानूनी निर्देशों के उल्लंघन पर अब सख्त कारावास का सामना करना पड़ सकता है। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच इस मुद्दे पर पिछले कई वर्षों से गहरा मतभेद था। उत्तरी और पश्चिमी यूरोपीय देशों तथा सीमावर्ती (विशेषकर भूमध्यसागरीय) देशों के बीच बोझ साझा करने और सुरक्षा मानकों को लेकर तनातनी थी, लेकिन हाल के महीनों में बढ़ती सामाजिक अस्थिरता और आर्थिक दबावों के कारण सभी सदस्य देशों के बीच अंततः एक आम सहमति बनी, जिसे यूरोपीय सुरक्षा और एकजुटता समझौता कहा जा रहा है।

इस कानून के प्रभाव पर प्रतिक्रियाएं ध्रुवीकृत हैं। मानवाधिकार संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं ने इस कानून की कड़ी निंदा करते हुए इसे शरणार्थियों के बुनियादी मानवीय अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि यह नीति लोगों को असुरक्षित देशों की ओर धकेलने जैसी है। इसके विपरीत, यूरोपीय सरकारों का कहना है कि यह कानून उनकी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने की रक्षा के लिए अपरिहार्य है।

इस कानून का व्यापक प्रभाव न केवल यूरोपीय संघ के भीतर महसूस किया जाएगा, बल्कि अफ्रीका और मध्य पूर्व के उन देशों पर भी पड़ेगा, जहाँ से प्रवासियों का सबसे अधिक आवागमन होता है। ये देश अब अपनी विदेश नीति और प्रवासन प्रबंधन पर पुन: विचार करने के लिए मजबूर होंगे। अब, जब यह कानून सदस्य देशों में आधिकारिक तौर पर लागू होने की प्रक्रिया शुरू करेगा, तो आने वाले कुछ महीनों में यूरोपीय सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और प्रवासन प्रबंधन में अभूतपूर्व और व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे, जो पूरे वैश्विक राजनीतिक मानचित्र को प्रभावित कर सकते हैं।