ओपेक की पहली महिला अध्यक्ष को अब जाकर राहत मिली
एजेंसियां
लंदनः नाइजीरिया की पूर्व तेल मंत्री और ओपेक की पहली महिला अध्यक्ष रह चुकीं डिजानी एलिसन-मादुके को लंदन की साउथवर्क क्राउन कोर्ट ने घूसखोरी के आरोपों से बरी कर दिया है। 65 वर्षीय एलिसन-मादुके पर आरोप था कि उन्होंने तेल उद्योग के रसूखदार अधिकारियों से ब्रिटेन में आलीशान घरों में रहने और महंगी खरीददारी जैसे उपहारों के रूप में रिश्वत ली थी। अदालत ने उन्हें रिश्वत लेने के पांच मामलों और घूसखोरी की साजिश रचने के एक मामले में निर्दोष पाया।
यह फैसला यूके की नेशनल क्राइम एजेंसी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो अफ्रीका की सबसे प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में गिनी जाने वाली एलिसन-मादुके के खिलाफ पिछले 13 वर्षों से जांच कर रही थी। जनवरी में शुरू हुए इस मुकदमे के दौरान, बचाव पक्ष के वकीलों ने अभियोजन पक्ष के मामले की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने तर्क दिया कि नाइजीरिया से वे महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हो गए थे, जो एलिसन-मादुके की निर्दोषता को साबित कर सकते थे। बचाव पक्ष ने इस मामले को अदालत तक लाने में हुई अत्यधिक देरी को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे ब्रिटेन की खस्ताहाल आपराधिक न्याय प्रणाली का प्रतीक करार दिया।
इस मामले में एलिसन-मादुके के साथ उनके बड़े भाई और मैनचेस्टर स्थित पेंटेकोस्टल चर्च के आर्कबिशप, 69 वर्षीय डोये अगामा को भी बरी कर दिया गया, जिन पर घूसखोरी की साजिश रचने का आरोप था। इसके अतिरिक्त, तेल उद्योग की कार्यकारी ओलाटिम्बो अयिंडे (54) को भी घूसखोरी और एक विदेशी लोक सेवक को रिश्वत देने के आरोपों से मुक्त कर दिया गया। गौरतलब है कि अयिंडे पर मुकदमा तब चलाया गया था जब वह नाइजीरियाई अधिकारियों द्वारा की जा रही भ्रष्टाचार-विरोधी जांच में एक मुखबिर की भूमिका निभा रही थीं।
न्यायालय के समक्ष एलिसन-मादुके ने खुद को महिलाओं के लिए एक आदर्श और भ्रष्टाचार के खिलाफ अथक संघर्ष करने वाली एक ऐसी अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया, जो नियमों के पालन को लेकर इतनी सख्त थीं कि उन्हें मैडम ड्यू प्रोसेस का उपनाम दिया गया था। साल 2006 में शेल जैसी बड़ी तेल और गैस कंपनी के बोर्ड में शामिल होने वाली वह पहली महिला थीं, और 2010 में तेल मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद 2014 में उन्होंने ओपेक की अध्यक्षता भी संभाली। अपनी सफाई में उन्होंने कहा, एक अत्यंत पितृसत्तात्मक समाज में, किसी महिला का नेतृत्व करना एक बड़ी वर्जना थी, और संकेत दिया कि यही कारण है कि उन्हें उनके पुरुष विरोधियों द्वारा निशाना बनाया गया।