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ममता ने भवानीपुर चुनाव को चुनौती दी

काफी समय से जिस बात की चर्चा थी वह अब पूरी हुई

  • शुभेंदु अधिकारी यहां से विजयी घोषित

  • ममता के साथ तीन सांसद भी थे

  • पंद्रह हजार मतों से पराजित हुई

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से अपनी चुनावी हार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में आधिकारिक रूप से चुनौती दी है। 16 जून, 2026 को बनर्जी ने उच्च न्यायालय पहुंचकर चुनाव परिणाम के खिलाफ एक विस्तृत चुनाव याचिका दायर की। यह कदम राज्य की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

याचिका दायर करने की प्रक्रिया काफी नाटकीय रही। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अप्रत्याशित रूप से खुद कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। वहां उन्होंने याचिका से संबंधित सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर किए। इस दौरान उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और प्रख्यात वकील व सांसद कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह याचिका चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतगणना में विसंगतियों को आधार बनाकर दायर की गई है। न्यायालय ने अब इस मामले को अपनी प्रक्रिया के तहत स्वीकार कर लिया है।

हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भवानीपुर सीट सबसे चर्चित सीटों में से एक थी। इस निर्वाचन क्षेत्र में ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा और कांटे का मुकाबला देखने को मिला था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, शुभेंदु अधिकारी इस क्षेत्र से विजयी घोषित किए गए और उन्हें राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में देखा गया।

आंकड़ों की बात करें तो यह मुकाबला बेहद कड़ा था। शुभेंदु अधिकारी ने कुल 73,917 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 मत प्राप्त हुए। इस प्रकार, बनर्जी को लगभग 15,000 मतों के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा। इस हार ने राज्य की सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया था।

बनर्जी की यह याचिका राज्य की चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। अब सबकी निगाहें कलकत्ता उच्च न्यायालय पर टिकी हैं कि इस चुनाव याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख क्या होगी और न्यायालय का रुख इस मामले में क्या रहता है। यह कानूनी लड़ाई न केवल भवानीपुर सीट के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक भविष्य की दिशा भी तय करेगी।