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Bhopal Samagra ID Fraud: भोपाल में समग्र आईडी डेटा में बड़ा फर्जीवाड़ा; 11.64 लाख लोगों ने नहीं कराई ई-केवाईसी

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य की गई ‘समग्र आईडी’ (Samagra ID) व्यवस्था की सरकारी पड़ताल में एक बहुत बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और खामियां सामने आई हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भोपाल जिले में कुल 31 लाख से अधिक पंजीकृत समग्र आईडी धारक मौजूद हैं. इनमें से चौंकाने वाली बात यह है कि 11 लाख 64 हजार से अधिक लोगों ने सरकार के बार-बार निर्देश देने के बावजूद अब तक अपनी अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है. इस सुस्ती के बीच प्रशासनिक अधिकारियों का यह बड़ा और हैरान करने वाला दावा है कि इन पेंडिंग आईडी में से करीब पांच लाख से अधिक समग्र आईडी पूरी तरह फर्जी (Fake) या डुप्लीकेट हो सकती हैं. डेटा शुद्धिकरण और लिंकिंग अभियान के दौरान यह गंभीर बात भी उजागर हुई है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर दो से तीन अलग-अलग समग्र आईडी सक्रिय रूप से चल रही थीं.

📋 जनकल्याणकारी योजनाओं की रीढ़ है समग्र डेटा: पेंशन, जाति प्रमाण पत्र और किसान निधि जैसी योजनाओं में अपात्रों द्वारा सेंधमारी की आशंका

प्रशासनिक गलियारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान में संचालित अधिकांश जनकल्याणकारी और वित्तीय लाभ वाली योजनाओं में समग्र आईडी को पूरी तरह अनिवार्य किए जाने के बाद भोपाल जिले के इस समग्र डेटा की शुद्धता और प्रामाणिकता पर गंभीर वित्तीय सवाल खड़े हो गए हैं. वर्तमान में आय प्रमाण पत्र, मूल निवासी प्रमाण पत्र, डिजिटल जाति प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस (EWS), बीपीएल (BPL) कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि समेत दर्जनों अति-महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे समग्र आईडी के माध्यम से ही हितग्राहियों को दिया जा रहा है. ऐसे में डेटा में इतनी बड़ी विसंगति और लाखों फर्जी आईडी की मौजूदगी से यह आशंका सच साबित होती दिख रही है कि सरकारी खजाने और योजनाओं के बजट में अपात्र लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर सेंधमारी की जा रही है, जिसे रोकने के लिए अब प्रशासन सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है.