एसयू 57 का निर्माण भारत में बिना किसी शर्त के
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संयुक्त रूप से निर्माण करेंगे
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भारतीय वायुसेना की जरूरत
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चीन और पाकिस्तान से पिछड़ रहा
एजेंसियां
मॉस्कोः रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 5 जून 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए भारत को रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट सुखोई एसयू-57 के लिए एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। वैश्विक समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत के दौरान, पुतिन ने न केवल इस विमान को भारत को आपूर्ति करने की इच्छा जताई, बल्कि इसे संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित करने का भी खुला प्रस्ताव दिया।
पुतिन ने स्पष्ट किया कि एसयू-57 को लेकर रूस और भारत के बीच सहयोग की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने कहा, हम इस मशीन को साझा रूप से विकसित करने और इसे और बेहतर बनाने के लिए तैयार हैं। इसमें किसी भी तरह के प्रतिबंध नहीं हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि 2007 में भारत और रूस ने फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन 2018 में भारत ने लागत और तकनीकी हस्तांतरण संबंधी चिंताओं के कारण इससे दूरी बना ली थी। पुतिन का मानना है कि यदि वह परियोजना सफल रहती, तो आज यह भारत और रूस का संयुक्त उत्पाद होता। भारतीय वायु सेना वर्तमान में अपनी लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या में कमी और चीन-पाकिस्तान द्वारा पांचवीं पीढ़ी के विमानों के अधिग्रहण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में एसयू-57 का प्रस्ताव भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।
भारत पहले से ही अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो भारत का सबसे महत्वाकांक्षी एयरोस्पेस कार्यक्रम है। इसकी पहली उड़ान 2029 और सेवा में प्रवेश 2034-35 तक अपेक्षित है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी एएमसीए के आने में अभी समय है, इसलिए भारत रूस के इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि रूस भारतीय वायुसेना की सभी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करता है, तो भारत कम से कम दो स्क्वाड्रन (लगभग 36 विमान) खरीदने पर विचार कर सकता है।
भले ही भारत रूस के साथ पुराने रक्षा साझेदार के रूप में जुड़ा है, लेकिन हाल के वर्षों में भारत ने राफेल जैसे विमानों के माध्यम से अपने रक्षा आयात को विविधतापूर्ण बनाया है। पुतिन का यह हालिया ऑफर दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को एक नई गति दे सकता है।
फिलहाल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और सुखोई डिजाइन ब्यूरो के बीच बातचीत का दौर जारी है। अंतिम निर्णय तकनीकी विशिष्टताओं, निवेश लागत और भारत की आत्मनिर्भरता की नीति के अनुरूप ही लिया जाएगा।