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CBSE Class 12th Results: ऑन-स्क्रीन मार्किंग में धांधली का आरोप; NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की PIL, स्वतंत्र जांच की मांग

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के लिए अपनाई गई नई ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली विवादों में घिर गई है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में भारी तकनीकी खामियों का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को देखते हुए कॉपियों की मैन्युअल जांच और पूरी प्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

⚠️ छात्रों का दर्द: धुंधली कॉपियां और गायब पन्ने

NSUI ने याचिका में दावा किया है कि रिजल्ट घोषित होने के बाद देशभर के हजारों छात्रों ने अपने अंकों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। छात्रों की मुख्य शिकायतें हैं:

  • उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियां स्पष्ट (धुंधली) नहीं होना।

  • मूल्यांकन के दौरान कई पन्नों का गायब होना।

  • कॉपियों का पूरी तरह अपलोड न होना।

  • सत्यापन पोर्टल में तकनीकी त्रुटियां आना।

⚖️ याचिका में प्रमुख मांगें

NSUI अध्यक्ष विनोद झाखर के माध्यम से दायर इस याचिका में कोर्ट से निम्नलिखित दिशा-निर्देश देने की मांग की गई है:

  1. मैन्युअल जांच: विवादित मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की भौतिक (Manual) जांच की अनुमति दी जाए।

  2. क्षतिपूर्ति अंक: जिन छात्रों की कॉपियां गुम हैं या गलत जांची गई हैं, उन्हें मुआवजे के रूप में अतिरिक्त अंक दिए जाएं।

  3. स्वतंत्र जांच: OSM प्रणाली की तकनीकी खामियों की एक स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

  4. समय सीमा का विस्तार: सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को एक महीने के लिए बढ़ाया जाए।

🛠️ ‘सिस्टम की खामियों का खामियाजा छात्र क्यों भुगतें?’

याचिका में तर्क दिया गया है कि तकनीकी समस्याएं बोर्ड के सिस्टम की हैं, जिसका नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है। करीब 1.27 लाख से अधिक छात्रों द्वारा स्कैन कॉपियों के लिए आवेदन करना यह दर्शाता है कि डिजिटल मूल्यांकन को लेकर छात्रों का विश्वास डगमगा गया है। मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था को अपर्याप्त बताते हुए NSUI ने मांग की है कि भविष्य के लिए CBSE को एक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए जाएं।

संपादकीय टिप्पणी: तकनीक का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है, लेकिन यदि इसमें तकनीकी खामियां छात्रों के करियर पर भारी पड़ रही हैं, तो बोर्ड को तत्काल सुधार की आवश्यकता है। क्या आपको लगता है कि बोर्ड को डिजिटल के साथ-साथ एक वैकल्पिक ‘मैन्युअल जांच’ का विकल्प हमेशा खुला रखना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।