मोदी कैबिनेट ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना को लागू किया
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पीडीएस पद्धति को मजबूती देना लक्ष्य
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इसके जरिए संसाधनों में बढ़ोत्तरी होगी
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ए आई संचालित पीडीएस रजिस्टर होगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को 25,000 करोड़ रुपये की सार्थक सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य भारत के खाद्य सुरक्षा नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना है, जो वर्तमान में लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को सहायता प्रदान करता है।
यह योजना उचित दर की दुकानों (राशन दुकानों) को मजबूत करने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने और खाद्यान्नों के राज्य के भीतर परिवहन (इंट्रा-स्टेट मूवमेंट) के लिए राज्य की एजेंसियों को सहायता प्रदान करने का प्रयास करती है।
इसे पूरी पीडीएस प्रणाली का एक ढांचागत सुधार बताते हुए वैष्णव ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मौजूदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बदलना नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क में परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सामग्री प्रबंधन (मटीरियल हैंडलिंग) की दक्षता में सुधार करना है। वैष्णव ने कहा, यह मौजूदा पीडीएस का प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) नहीं है। यह पीडीएस प्रणाली के परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सामग्री प्रबंधन में एक सुधार है। उन्होंने आगे जोड़ा कि राज्य सरकारों को बेहतर खाद्य वितरण व्यवस्था और अधिक कुशल आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) संचालन से लाभ होगा।
मंत्री ने कहा कि देश के खाद्य सुरक्षा ढांचे में दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक जुड़ाव को बेहतर बनाने के लिए इस कार्यक्रम को तीन मुख्य स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है।
पहला स्तंभ, निर्मल, एक एआई-संचालित वास्तविक समय का पीडीएस लाभार्थी रजिस्टर है जो कल्याणकारी वितरण को सुव्यवस्थित करने और दोहराव को कम करने के लिए लाइव अंतर-मंत्रालयी एकीकरण और क्रॉस-स्कीम सहयोग को सक्षम करेगा।
दूसरा स्तंभ, आशा, बहुभाषी एआई-संचालित शिकायत निवारण और नागरिक जुड़ाव पर केंद्रित है। अधिकारियों ने कहा कि व्हाट्सएप और चैटबॉट सेवाओं के साथ एकीकृत यह प्लेटफॉर्म प्रतिदिन तीन लाख तक की बातचीत (इंटरैक्शन) को संभालने के लिए सक्षम होगा।
तीसरा स्तंभ, सक्षम, एक एआई-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्लेटफॉर्म है, जिसमें लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार और खाद्यान्न की आवाजाही की निगरानी के उद्देश्य से वाहन ट्रैकिंग, क्यूआर-कोड आधारित ट्रैसेबिलिटी और मांग के पूर्वानुमान (डिमांड फोरकास्टिंग) के उपकरण शामिल हैं।
केंद्र के अनुसार, इस अनुकूलन (ऑप्टिमाइजेशन) कार्यक्रम से खाद्यान्न परिवहन के लिए यात्रा की दूरी 15-50 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है, जिससे परिचालन दक्षता में सुधार होगा और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी।