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HDFC Bank Controversy: 45 करोड़ रुपये के कथित भुगतान मामले में जांच; बैंक ने आरोपों को किया खारिज

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank Ltd पर 45 करोड़ रुपये के कथित अनुचित भुगतान का आरोप लगा है, जिसके बाद बैंक में आंतरिक विजिलेंस जांच शुरू होने की खबरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि, बैंक ने इन दावों को पूरी तरह से निराधार बताया है। बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि अधूरी और चुनिंदा जानकारी के आधार पर गलत निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसकी ऑडिट और कंट्रोल प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी है। इस खबर के बाद बुधवार को बैंक के शेयरों में लगभग 2.5 फीसदी की गिरावट देखी गई और यह करीब 760 रुपये के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

🔍 क्या है 45 करोड़ रुपये का कथित मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक की ऑडिट कमेटी ने एक बड़े भुगतान को लेकर औपचारिक आंतरिक जांच शुरू की है। आरोप है कि यह रकम महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) को अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर की गई थी। दावा किया गया है कि तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए बैंक ने इसे सीधे ‘ब्याज’ न दिखाकर ‘मार्केटिंग खर्च’ के तौर पर दिखाया। रिपोर्ट्स का आरोप है कि बैंक ने चार स्थानीय वेंडर्स के जरिए ‘रोड सेफ्टी जागरूकता अभियान’ के नाम पर यह भुगतान किया था।

🛡️ बैंक का आधिकारिक रुख

HDFC Bank का कहना है कि किसी भी मामले में बैंक की आंतरिक निगरानी टीम पूरी गहन प्रक्रिया के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेती है। बैंक के अनुसार, उनकी सभी वित्तीय प्रक्रियाएं तय नियमों और पारदर्शिता के साथ संचालित होती हैं। इस मामले में भी बैंक ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है और आरोपों को केवल भ्रामक जानकारी करार दिया है। फिलहाल, निवेशक और बाजार विश्लेषक इस मामले पर बैंक की अगली आधिकारिक रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं।