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AI Impact on Jobs: भारत में AI से बैक ऑफिस और डेटा से जुड़ी नौकरियों पर बड़ा खतरा; SHRM रिपोर्ट 2026 में खुलासा

नई दिल्ली: भारत के कॉर्पोरेट जगत और औद्योगिक क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का इस्तेमाल बड़ी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन देश की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी अब भी इस बड़े तकनीकी बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। हाल ही में जारी की गई ‘SHRM इंडिया स्किल इंटेलिजेंस रिपोर्ट 2026’ में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि आने वाले तीन सालों में बैक ऑफिस, डेटा मैनेजमेंट और कस्टमर सर्विस जैसी पारंपरिक नौकरियों पर इसका सबसे बड़ा और सीधा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की करीब 45 प्रतिशत कंपनियां इस समय अपने वर्कफोर्स में एआई और आधुनिक डिजिटल स्किल्स (Digital Skills) की भारी कमी से जूझ रही हैं। इस विषय पर वैश्विक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर समय रहते कर्मचारियों के स्किल डेवलपमेंट पर युद्ध स्तर पर काम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में लाखों कर्मचारियों के करियर के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

📊 बैक ऑफिस और डेटा रोल्स पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा: अगले तीन वर्षों में बड़े पैमाने पर प्रभावित होंगे जॉब्स

SHRM इंडिया स्किल इंटेलिजेंस रिपोर्ट 2026 के बारीक विश्लेषण के अनुसार, एआई और मशीन लर्निंग का सबसे ज्यादा नकारात्मक व परिवर्तनकारी असर बैक ऑफिस और डेटा एंट्री/प्रोसेसिंग से जुड़ी नौकरियों पर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि अगले तीन वर्षों के भीतर करीब 28 प्रतिशत बैक ऑफिस रोल्स और 24 प्रतिशत डेटा एवं रिपोर्टिंग से जुड़ी जॉब्स सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, लगभग 21 प्रतिशत कस्टमर सर्विस (कस्टमर केयर) की नौकरियों में भी एआई आधारित ऑटोमेशन और चैटबॉट्स का चलन तेजी से बढ़ सकता है। इस व्यापक रिपोर्ट को तैयार करने के लिए देश भर के 198 से ज्यादा सीनियर एचआर (HR) और लर्निंग लीडर्स से गहन बातचीत की गई थी। इस पर SHRM के ग्लोबल प्रेसिडेंट जॉनी सी टेलर जूनियर ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि चूंकि भारत के पास इस समय दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स (युवा आबादी) है, इसलिए सही दिशा में काम करके देश के पास भविष्य की ग्लोबल डिजिटल टैलेंट कैपिटल बनने का एक बेहतरीन मौका मौजूद है।

📉 भारत में स्किल ट्रेनिंग की स्थिति अभी भी काफी कमजोर: पारंपरिक और गलत ट्रेनिंग मॉडल पर कंपनियां खर्च कर रही हैं 60% बजट

इस रिपोर्ट में भारतीय बाजार के लिहाज से सबसे चिंताजनक बात भारत की बेहद कम फॉर्मल ट्रेनिंग (औपचारिक प्रशिक्षण) दर को बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 2.3 प्रतिशत कर्मचारियों को ही उनके कार्यस्थल पर किसी प्रकार की औपचारिक तकनीकी ट्रेनिंग मिलती है। इसके विपरीत वैश्विक स्तर पर देखें तो यूके (UK) में यह आंकड़ा 68 प्रतिशत, जर्मनी में 75 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

रिपोर्ट में यह भी एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है कि भारतीय कंपनियां अभी भी पुराने और गलत ट्रेनिंग मॉडल पर अपना ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं। कंपनियों के कुल ट्रेनिंग बजट का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा केवल थ्योरिटिकल डिजिटल कोर्स और क्लासरूम ट्रेनिंग पर खर्च हो रहा है, जबकि प्रैक्टिकल (प्रायोगिक) और ‘हैंड्स ऑन लर्निंग’ पर सिर्फ 3 प्रतिशत का नाममात्र निवेश किया जा रहा है। यही कारण है कि केवल 34 प्रतिशत कंपनियां ही अपने स्किलिंग प्रोग्राम के वास्तविक परिणामों को सही तरीके से मापने में सक्षम हैं।

💡 एआई तकनीक अपनाने में भारतीय कंपनियों के सामने कई मुश्किलें: नेतृत्व की कमी और सस्टेनेबिलिटी स्किल्स का बड़ा संकट

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कॉर्पोरेट स्तर पर एआई अपनाने की रफ्तार तकनीक की उपलब्धता के कारण नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व (लीडरशिप) की हिचकिचाहट और निवेश से जुड़ी चिंताओं के कारण काफी धीमी बनी हुई है। देश की करीब 54 प्रतिशत कंपनियों ने खुलकर माना कि उनके यहां एआई तकनीक में निवेश को लेकर अभी भी बोर्ड रूम में मध्यम या बेहद कम स्तर की गंभीरता देखी जा रही है। वहीं, 44 प्रतिशत कंपनियों ने सही दिशा में लीडरशिप की कमी और ROI (निवेश पर रिटर्न) की अनिश्चितता को एआई लागू करने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बताया।

इसके साथ ही, रिपोर्ट में ईएसजी (ESG) और ग्रीन स्किल्स की कमी पर भी गहरी चिंता जताई गई है। लगभग 41 प्रतिशत कंपनियों ने स्वीकार किया कि उनके पास पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी आधुनिक स्किल्स की भारी कमी है। इस पूरे परिदृश्य पर अपनी राय रखते हुए SHRM APAC और MENA के सीईओ अचल खन्ना ने कहा कि भारत इस समय वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन (कार्यबल परिवर्तन) के एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। आने वाले समय में बाजार में केवल वही कंपनियां और कर्मचारी टिक पाएंगे, जो समय की मांग को भांपते हुए खुद को नई स्किल्स के अनुसार ढाल लेंगे।