Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
झारखंड कांग्रेस का बड़ा एक्शन: पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी को थमाया कारण बताओ नोटिस, 7 दिनों में मा... देवघर में राजकीय श्रावणी मेला 2026 का भव्य शुभारंभ, कांवरियों के लिए पहली बार शुरू हुई नि:शुल्क क्लॉ... झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से बड़ा अपडेट, 14 लाख से अधिक वोटर हुए अनमैप्ड पाकुड़ के तिलभीट्टा गांव में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गांजे के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया एक कारोबारी 2 करोड़ 20 लाख के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद रांची पहुंचे सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह महतारी वंदन योजना के तहत फॉर्म भरने के बाद भी नहीं मिली पहली किस्त, MCB जिले की महिलाओं का फूटा गुस्... देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन 'राष्ट्रपति भवन' में रचा गया इतिहास, बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति ... सूरजपुर की जयनगर सहकारी समिति में 20 लाख का खाद घोटाला, रिकॉर्ड से गायब पाई गईं यूरिया व डीएपी की बो... कोरिया: कटकोना सरपंच शिप्रा पद से बर्खास्त! एसडीएम बैकुण्ठपुर ने धारा 40(1) के तहत जारी किया आदेश कांकेर में 15.50 करोड़ की नहर लाइनिंग पहली ही बारिश में ढही! दुधावा डैम नहर टूटने से 35 एकड़ फसल जलम...

लाल किला विस्फोट मामला में एनआईए ने चार्जशीट दाखिल कर दी

अल-कायदा से जुड़े व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने देश की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पिछले वर्ष दिल्ली के लाल किले के समीप हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट मामले में अपना व्यापक आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया यह दस्तावेज लगभग 7,500 पन्नों का है, जो इस आतंकी साजिश की गहराई और जटिलता को उजागर करता है। जांच एजेंसी ने इस मामले में कुल 10 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया है।

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक और चौंकाने वाला पहलू व्हाइट-कॉलर आतंकवाद का उदय है। एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, इस खूनी साजिश में समाज के उच्च शिक्षित वर्ग, विशेषकर चिकित्सा पेशेवरों की सीधी भागीदारी पाई गई है। आमतौर पर आतंकवाद को अशिक्षा या कट्टरपंथ से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

यह भीषण विस्फोट 10 नवंबर 2025 को हुआ था, जिसने पूरी राजधानी को दहला दिया था। इस उच्च तीव्रता वाले बम धमाके में 11 मासूम नागरिकों ने अपनी जान गंवाई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल होकर अपाहिज हो गए थे। जांच में स्पष्ट हुआ है कि इस हमले को अंसार गजवत-उल-हिंद नामक संगठन ने अंजाम दिया था। यह संगठन वैश्विक आतंकी नेटवर्क अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप में एक सक्रिय शाखा है।

एनआईए की जांच की सुई हरियाणा स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय की ओर मुड़ी, जहां से इस पढ़े-लिखे आतंकी मॉड्यूल के तार जुड़े मिले। आरोपपत्र के मुताबिक, विश्वविद्यालय में कार्यरत तीन डॉक्टर इस पूरी साजिश के केंद्र में थे। हमले के मुख्य अपराधी और कथित आत्मघाती हमलावर, डॉ. उमर उन नबी (जिसकी विस्फोट के दौरान मृत्यु हो गई), सहित अन्य आरोपी डॉक्टर आधुनिक तकनीक और चिकित्सा ज्ञान का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए कर रहे थे।

एनआईए के अनुसार, यह मॉड्यूल अल-कायदा की विनाशकारी विचारधारा से पूरी तरह प्रेरित था और इनका मुख्य उद्देश्य देश की राजधानी में बड़े पैमाने पर तबाही मचाकर सरकार को अस्थिर करना था। जांचकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उच्च शिक्षित पेशेवरों का इस प्रकार कट्टरपंथ की ओर मुड़ना और विस्फोटक तकनीकों का उपयोग करना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक अत्यंत गंभीर और उभरती हुई चुनौती है। फिलहाल, विशेष अदालत इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही और सुनवाई की तैयारी कर रही है।