अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82 पैसे लुढ़का रुपया
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प्रधानमंत्री की अपील पर प्रतिक्रिया आयी
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वैश्विक तनाव और कच्चे तेल का प्रभाव
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बाजार में घबड़ाहट का माहौल बन गया
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः भारतीय मुद्रा बाजार के लिए सोमवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 82 पैसे की भारी गिरावट के साथ 95.31 (अस्थायी) के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू आर्थिक चिंताओं के दोहरे दबाव ने निवेशकों के उत्साह को पूरी तरह से ठंडा कर दिया, जिससे घरेलू मुद्रा में यह ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई।
रुपये में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में गहराता संकट है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पश्चिम एशिया शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को खारिज किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया। इस कूटनीतिक विफलता के तुरंत बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
घरेलू मोर्चे पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सोने की खरीद टालने और मितव्ययिता अपनाने का आग्रह किया है। सरकार की ओर से किए गए इस आह्वान को निवेशकों ने अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी के रूप में लिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड और अन्य विलासिता की वस्तुओं पर नियंत्रण की अपील ने यह संकेत दिया है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में है, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बन गया और रुपये की बिकवाली तेज हो गई।
कारोबार के दौरान रुपया एक समय और भी निचले स्तर तक चला गया था, लेकिन अंत में यह 95.31 पर स्थिर हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में रुपया 96 के स्तर को भी पार कर सकता है। फिलहाल, बाजार की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप और वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।