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संदिग्ध तस्करों के शव बांग्लादेश को सौंपे गये

भारतीय सीमा के भीतर आने के दौरान फायरिंग में मारे गये

  • दोनों मृतकों की पहचान कर ली गयी

  • हमला के बाद बीएसएफ की फायरिंग

  • बीजीबी को सौंपे गये दोनों के शव

राष्ट्रीय खबर

अगरतला, त्रिपुरा: पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती राज्य त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुई एक गंभीर घटना के बाद अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में है। सीमा सुरक्षा बल ने त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जीरो पॉइंट पर शनिवार तड़के हुई फायरिंग में मारे गए दो संदिग्ध बांग्लादेशी तस्करों के शवों को रविवार को आधिकारिक तौर पर बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंप दिया।

यह घटना सिपाहीजाला जिले के कमलासागर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती इलाके में घटित हुई। मारे गए व्यक्तियों की पहचान 40 वर्षीय नबीर हुसैन और 22 वर्षीय मोहम्मद मुरसलीन के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर सीमा पार सक्रिय तस्करी गिरोह का हिस्सा थे। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र के निवासियों और सीमा रक्षकों के बीच भारी तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

आधिकारिक सूत्रों और बीएसएफ के बयान के अनुसार, शनिवार की रात जब सीमा सुरक्षा बल के जवान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नियमित रात्रि गश्त कर रहे थे, तब उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों को देखा। कोहरे और अंधेरे का फायदा उठाते हुए संदिग्ध तस्करों का एक बड़ा समूह भारतीय सीमा क्षेत्र से तस्करी का सामान बांग्लादेश की ओर ले जाने का प्रयास कर रहा था।

जवानों ने जब इस समूह को ललकारा और उन्हें तुरंत रुकने की चेतावनी दी, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बीएसएफ की बार-बार दी गई चेतावनियों को अनसुना करते हुए संदिग्ध तस्कर पीछे हटने के बजाय हिंसक हो गए। उन्होंने जवानों को घेरने की कोशिश की और उन पर पत्थरों व ईंटों से हमला करना शुरू कर दिया।

बीएसएफ के अधिकारियों ने बताया कि जवानों ने शुरुआत में अत्यधिक संयम बरता और गैर-घातक तरीकों से भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया। हालांकि, जब भीड़ और अधिक उग्र हो गई और जवानों की जान पर बन आई, तो आत्मरक्षा में पंप एक्शन गन से कुछ राउंड फायरिंग की गई। इस गोलीबारी में दो तस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत स्थानीय सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उपचार के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शनिवार दोपहर को कानूनी औपचारिकताओं और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके पश्चात, रविवार को सीमा पर दोनों देशों के अधिकारियों की मौजूदगी में फ्लैग मीटिंग आयोजित हुई। इस बैठक में बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिसके बाद दोनों शवों को ससम्मान बांग्लादेशी प्रशासन को सौंप दिया गया।

यह घटना एक बार फिर भारत-बांग्लादेश सीमा पर व्याप्त जटिल सुरक्षा चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा होती है, जिसमें से केवल त्रिपुरा राज्य की सीमा ही 856 किलोमीटर लंबी है। कड़े पहरे, आधुनिक निगरानी तंत्र और अधिकतर हिस्सों में कंटीले तारों की फेंसिंग होने के बावजूद यह क्षेत्र तस्करी के लिए संवेदनशील बना हुआ है। सीमा पार से मादक पदार्थों, पशु तस्करी, मानव तस्करी और अवैध हथियारों की आवाजाही सुरक्षा बलों के लिए एक निरंतर सिरदर्द बनी हुई है। बीएसएफ अक्सर इन तस्करों को रोकने के लिए गैर-घातक हथियारों का उपयोग करती है, लेकिन तस्करों के हिंसक होने पर स्थिति कई बार जानलेवा मुठभेड़ में बदल जाती है।