अटलांटिक महासागर में फंसे आलीशान क्रूज पर वायरस का प्रकोप
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अटलांटिक महासागर में फंसे एक लक्जरी अभियान जहाज पर सवार 149 लोगों में दो भारतीय चालक दल के सदस्य भी शामिल हैं। इस जहाज पर अब तक तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है और आठ अन्य हंतावायरस से संक्रमित हैं, जिसे दुनिया के दुर्लभतम और सबसे घातक वायरसों में से एक माना जाता है।
एमवी होंडियस का संचालन करने वाली डच ध्रुवीय यात्रा कंपनी ओशनवाइड एक्सपीडिशन से जहाज पर सवार लोगों का पूरा विवरण माँगा गया था। कंपनी ने अपने जवाब में पहली बार प्रत्येक यात्री और चालक दल के सदस्य की राष्ट्रीयता का विवरण प्रदान किया। जहाज पर कुल 23 देशों के 149 लोग सवार हैं।
इनमें अधिकांश यात्री ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और स्पेन के पर्यटक हैं। लेकिन चालक दल की सूची में फिलीपींस, यूक्रेन, नीदरलैंड और पोलैंड के नाविकों के साथ दो भारतीयों के नाम भी दर्ज हैं। ओशनवाइड एक्सपीडिशन ने उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि तो की है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की स्थिति का खुलासा नहीं किया है। जहाज पर उनकी भूमिका क्या है और क्या वे संक्रमित यात्रियों के संपर्क में आए थे, यह अभी भी अज्ञात है।
जहाज पर फैला यह वायरस हंतावायरस का एंडिस स्ट्रेन है, जो मनुष्यों के बीच फैल सकता है। हालांकि, यह हवा के जरिए नहीं फैलता, बल्कि अत्यधिक निकट संपर्क (जैसे केबिन साथी या बिना सुरक्षा के इलाज कर रहे डॉक्टर) से फैलता है।
अर्जेंटीना के जाँचकर्ताओं का मानना है कि इस संक्रमण का स्रोत दुनिया के सबसे दक्षिणी शहर उशुआया में आयोजित एक बर्डवाचिंग टूर था। माना जा रहा है कि उस दौरे पर गए एक डच जोड़े ने अनजाने में जमीन पर मौजूद संक्रमित कृंतकों (चूहों आदि) के मल के सूक्ष्म कणों को सांस के जरिए अंदर ले लिया था। वे स्वस्थ महसूस कर रहे थे और बिना किसी जानकारी के जहाज पर सवार हो गए, जिससे यह संक्रमण फैला।