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सुप्रीम कोर्ट में अब होंगे 38 न्यायाधीश

चुनावी व्यस्तता खत्म तो केंद्र सरकार का कामकाज तेज

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद में पेश करने का निर्णय लिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करना है, ताकि मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 की जा सके। मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर यह कुल संख्या 38 हो जाएगी।

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, न्यायाधीशों की संख्या में इस वृद्धि से उच्चतम न्यायालय अधिक कुशलता और प्रभावशीलता के साथ कार्य कर सकेगा। शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के भारी बोझ को कम करने और आम नागरिकों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में इसे एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित कर सके। 1950 में जब सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब मुख्य न्यायाधीश सहित इसमें केवल आठ न्यायाधीश हुआ करते थे।

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि का एक लंबा इतिहास रहा है। 1956 में इसे बढ़ाकर 11 किया गया, फिर 1960 में 14 और 1977 में 18 किया गया। 1986 में संख्या 26 तक पहुँची और 2009 में इसे बढ़ाकर 31 किया गया। सबसे हालिया बदलाव वर्ष 2019 में हुआ था, जब न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 31 से बढ़ाकर 34 की गई थी। अब 2026 के इस नए संशोधन के माध्यम से सरकार न्यायिक प्रणाली को और सुदृढ़ करने का प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त चार न्यायाधीशों की नियुक्ति से संवैधानिक पीठों के गठन और दैनिक अपीलों की सुनवाई में आने वाली बाधाएं दूर होंगी, जिससे न्याय वितरण की गति तेज होगी।