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अमीबा के प्रसार से जानलेवा खतरा, देखें वीडियो

सूक्ष्म जीवों के समूह पर वैश्विक चेतावनी जारी की गयी

  • यह वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम बन रहा है

  • पानी के साथ शरीर में प्रवेश करता है यह

  • पुरानी पद्धतियों से अब ये खत्म नहीं होते

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिकों ने वैश्विक स्तर पर खतरनाक अमीबा के प्रसार को लेकर चेतावनी जारी की है। पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ने उन सूक्ष्म जीवों के समूह पर चिंता व्यक्त की है जिन्हें अब तक काफी हद तक नजरअंदाज किया गया है, लेकिन वे दुनिया भर में एक बड़ा खतरा बन सकते हैं। इन्हें फ्री लिविंग अमीबा (एफएलए) कहा जाता है।

हाल ही में बायोकॉन्टामिनेंट में प्रकाशित एक लेख में शोधकर्ताओं ने बताया कि ये नन्हे जीव एक उभरते हुए वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम के रूप में सामने आ रहे हैं। इनके प्रसार के पीछे बढ़ते तापमान, जर्जर होता जल बुनियादी ढांचा और इनके पता लगाने वाली प्रणालियों की कमी मुख्य कारण हैं।

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क्या हैं फ्री लिविंग अमीबा? अमीबा एककोशिकीय जीव हैं जो प्राकृतिक रूप से मिट्टी, ताजे पानी और यहां तक कि मानव निर्मित जल प्रणालियों में रहते हैं। इनमें से अधिकांश अमीबा हानिकारक नहीं होते और पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका निभाते हैं, लेकिन कुछ प्रजातियां मनुष्यों को संक्रमित कर गंभीर बीमारी का कारण बन सकती हैं। यद्यपि ये संक्रमण दुर्लभ हैं, लेकिन होने पर ये अत्यंत घातक साबित होते हैं। इसका सबसे चर्चित उदाहरण नेगलेरिया फाउलेरी है, जिसे दिमाग खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है। यह दूषित पानी के नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करने पर मस्तिष्क तक पहुंचकर जानलेवा संक्रमण फैलाता है।

सन यात-सेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता लोंगफेई शू के अनुसार, ये जीव उन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं जो अन्य सूक्ष्मजीवों को मार देती हैं। ये उच्च तापमान और क्लोरीन जैसे मजबूत कीटाणुनाशकों को सहन कर लेते हैं। मानक जल उपचार विधियां, विशेष रूप से पुरानी प्रणालियों में, इन्हें पूरी तरह खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

ट्रोजन हॉर्स प्रभाव और जलवायु परिवर्तन ये अमीबा अन्य हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस के लिए एक सुरक्षा कवच (होस्ट) के रूप में कार्य करते हैं, जिसे ट्रोजन हॉर्स प्रभाव कहा जाता है। इसके भीतर छिपे रोगाणु कीटाणुनाशकों से बचे रहते हैं, जिससे पेयजल प्रणालियों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, बढ़ता वैश्विक तापमान इनके प्रसार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। अब ये अमीबा उन क्षेत्रों में भी पाए जा रहे हैं जहां पहले इनका अस्तित्व नहीं था।

बेहतर निगरानी की आवश्यकता शोधकर्ताओं ने वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण विज्ञान और जल प्रबंधन विशेषज्ञों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उन्नत जल उपचार तकनीकों और सटीक निगरानी प्रणालियों के विकास पर जोर दिया है ताकि इस अदृश्य खतरे से वैश्विक स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

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