बांग्लादेश ने भारत से औपचारिक शिकायत की
-
बांग्लादेशियों को धकेलने की बात कही थी
-
भारतीय राजदूत को वहां तलब किया गया
-
ऐसे बयान अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक गलियारों में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा हाल ही में दिए गए एक विवादास्पद बयान पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। इस विरोध को आधिकारिक रूप देने के लिए बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में तैनात कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त पवन बढे को तलब किया और अपना विरोध पत्र सौंपा।
यह पूरा विवाद 26 अप्रैल को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा दिए गए एक सार्वजनिक बयान से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया है और उन्हें वापस बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिया गया है। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और नागरिकता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए इस बयान को बांग्लादेश ने अपनी संप्रभुता और द्विपक्षीय संबंधों के प्रति अपमानजनक माना है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय में महानिदेशक इशरत जहां ने कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त के साथ बैठक की। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के दौरान ढाका ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां भारत और बांग्लादेश के बीच वर्षों से चले आ रहे मधुर संबंधों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
बांग्लादेशी कूटनीतिज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी सार्वजनिक टिप्पणियां दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव पैदा करती हैं और द्विपक्षीय सहयोग के लिए प्रतिकूल साबित होती हैं। संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करते समय दोनों पक्षों के जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों को संयम बरतने की आवश्यकता है। इस तरह के बयान ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्तों के बीच एक अनावश्यक कड़वाहट पैदा करते हैं।
हालांकि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है, लेकिन उच्चायुक्त को तलब करना अपने आप में एक कड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश ने भारत को अपनी नाराजगी से स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है। भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवास हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में जब दोनों देश आर्थिक और ढांचागत क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं, इस तरह के बयान कूटनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।