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बांग्लादेश और भारत ने वीजा निलंबन किया

चुनाव से पहले छात्र नेताओँ पर हमले से रिश्ते बिगड़े

ढाका: दक्षिण एशिया के दो प्रमुख पड़ोसी देशों, भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों में पिछले कुछ दशकों की सबसे बड़ी गिरावट देखी जा रही है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए भारतीय नागरिकों के लिए सभी वीजा सेवाओं को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी है। यह निर्णय न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को प्रभावित करेगा, बल्कि यह बढ़ते कूटनीतिक तनाव का एक स्पष्ट संकेत भी है।

ढाका में भारतीय उच्चायोग और उसके केंद्रों के बाहर सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए बांग्लादेश ने यह कदम उठाया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह भारत के प्रति बांग्लादेश की नई सत्ता के कड़े रुख का हिस्सा है। इस निलंबन के कारण हज़ारों भारतीय पेशेवरों, व्यापारियों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जवाब में, भारत ने भी अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है और बांग्लादेश में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी की है।

एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव है, वहीं बांग्लादेश के भीतर की स्थिति भी विस्फोटक बनी हुई है। पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यक समुदायों (विशेषकर हिंदुओं) के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है। उनके घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है। मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है, लेकिन स्थानीय प्रशासन स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने में विफल दिख रहा है।

इसी बीच, बांग्लादेश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता तब और बढ़ गई जब आंदोलन का चेहरा रहे कई प्रमुख छात्र नेताओं पर जानलेवा हमले हुए। इन हमलों के विरोध में ढाका विश्वविद्यालय और शाहबाग जैसे इलाकों में हज़ारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुरानी सत्ता के समर्थक और कट्टरपंथी तत्व मिलकर देश के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के कारण ढाका की सड़कों पर यातायात पूरी तरह ठप है और व्यावसायिक केंद्र बंद पड़े हैं।

व्यापार ठप: भारत के साथ होने वाला सीमा व्यापार, जो बांग्लादेश की आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण है, वीजा सेवाओं के बंद होने से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सप्लाई चेन में रुकावट: देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के कारण माल ढुलाई नहीं हो पा रही है, जिससे दैनिक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। अस्थिरता के कारण विदेशी कंपनियां और गारमेंट इंडस्ट्री के बड़े खरीदार अब बांग्लादेश से दूरी बनाने की सोच रहे हैं।

बांग्लादेश इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। एक ओर उसे भारत जैसे महत्वपूर्ण पड़ोसी के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अपने ही देश के भीतर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बहाल करने की जिम्मेदारी है। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो इसका खामियाजा पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता को भुगतना पड़ सकता है।